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 एटीएम कैशलेस यानी फिर तिजोरियों में जमा कैश

Wed, 09 May 2018 06:29 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
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जमाखोरी के चलते दो हजार के नोटों की किल्लत लगातार बढ़ रही है। बैंक अधिकारियों की मानें तो यहां करीब एक दर्जन करेंसी चेस्ट के माध्यम से आरबीआई दो हजार के जितने नोट दे रही है, उनमें से 20 से 25 फीसदी ही सर्कुलेट हो पा रहे हैं। इससे एटीएम में भी फीडिंग के लिए दो हजार के नोटों की गड्डी नहीं मिल पा रही है। तमाम बैंकों ने अपने एटीएम में दो हजार कैश फीडिंग का कैसेट तक नहीं बनवाया है। इधर, दो हजार के नोट कम होने से बैंकों के साथ ग्राहकों को भी परेशानी हो रही है, जबकि सरकार यह तर्क देते हुए दो हजार के नए नोट छापने से इंकार कर रही है कि ये नोट जरूरत से ज्यादा छप चुके हैं। 
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नोटबंदी के दौरान तिजोरियों में जमा कैश अचानक बाहर आ गया था। जमाखोर लंबे वक्त तक इस झटके को बर्दाश्त नहीं कर सके थे, लेकिन डंप पड़े नोट प्रचलन में आ गए थे। इसके बाद सरकार ने करेंसी के संकट को खत्म करने के लिए 2000 और 500 के नए नोट जारी किए थे। अब यही नोट एक बार फिर जमाखोरी के लिए इस्तेमाल होने लगे हैं। बैंक अधिकारियों का कहना है कि जिले की करीब सवा चार सौ बैंक शाखाओं को नोटों की आपूर्ति के लिए एक दर्जन करेंसी चेस्ट हैं। ये एसबीआई, पीएनबी, सेंट्रल बैंक, यूको बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, ओरियंटल बैंक ऑफ कामर्स, बॉब सहित अन्य शाखाओं में बने हैं। आरबीआई इन्हीं चेस्ट के जरिये हर वर्ष 25 से 30 अरब करेंसी मुहैया कराती है। जबकि इनमें दो हजार के जितने नोट सप्लाई हो रहे हैं, उनका बाजार में बीस से पचीस परसेंट ही सर्कुलेशन हो पा रहा है। पब्लिक के दो हजार के नोट न जमा करने से बैंकों में इसका अकाल बना हुआ है। इसकी वजह से एटीएम में भी दो हजार के नोटों का टोटा खत्म नहीं हो पा रहा है। जबकि सिक्कों को लेकर इन दिनों अजीबो-गरीब स्थिति बनी हुई है। लोग 10 और पांच के सिक्के नहीं ले रहे हैं। इसलिए करोड़ों रुपये के सिक्के बैंकों में डंप हैं। पहले बैंकों ने भी ग्राहकों से सिक्के में आनाकानी शुरू कर दी है। इसका ग्राहकों ने काफी विरोध किया था, लेकिन अप्रैल 2017 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने यह आदेश जारी कर दिया कि कोई भी बैंक ग्राहकों से एक दिन में एक हजार तक के सिक्के जमा करने से इंकार नहीं कर सकती है। इसका लोगों ने खूब फायदा उठाया। 



 
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एटीएम कैशलेस यानी फिर तिजोरियों में जमा कैश

atm - फोटो : अमर उजाला
25 फीसदी एटीएम बंद, बाकी में 40 फीसदी से कम ट्रांजेक्शन कम
कैश की कमी के बीच तमाम एटीएम ऐसे थे, जहां हर रोज औसत से काफी कम ट्रांजेक्शन हो रहा था। बैंक ऑफ बड़ौदा ऐसे करीब 19 एटीएम बंद कर चुका है। हालांकि बैंक अधिकारी इसके लिए आउट सोर्सिंग के गलत सर्वे को भी जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। बैंक अधिकारियों का कहना है कि सर्वे करने वाली एजेंसी स्थानीय स्तर पर अफसरों से कोई सुझाव नहीं लेती। इससे कई जगहों पर एटीएम खुल जाते हैं, जहां पब्लिक का कम आना-जाना है। इससे 40 फीसदी से कम ट्रांजेक्शन ही हो पा रहा है।


ट्रांजेक्शन टैक्स बचाने को भी पब्लिक का एटीएम से किनारा
रूपे और वीसा कार्ड पर ग्राहक एक दिन में 25 हजार और प्लेटिनम कार्ड पर 40 हजार रुपये तक निकाल सकता है। एक महीने में ग्राहक अपने बैंक के एटीएम से पांच बार पैसा निकाल सकता है, जबकि दूसरे बैंक के एटीएम से तीन बार पैसा निकाला जा सकता है। बैंक एटीएम में हर बार किसी न किसी कारण से ग्राहकों को अपने बैंक के एटीएम से पैसा निकालने को नहीं मिलता है। इस कारण ग्राहकों को दूसरे एटीएम का सहारा लेना पड़ता है। ग्राहकों को दूसरे एटीएम से तीन बार पैसा निकालने के बाद ट्रांजेक्शन चार्ज देना पड़ता है। इसके अलावा ग्राहकों को परेशानी यह भी झेलनी पड़ रही है कि ज्यादातर एटीएम अपने निर्धारित सीमा से कम मात्रा में एक मुश्त कैश दे पा रहे हैं। सरकारी और प्राइवेट बैंक तय ट्रांजेक्शन पर 18 से 37 रुपये तक का चार्ज वसूल रही हैं।

रोजाना पेमेंट करने वाले व्यापारी भी गल्ले से कर रहे भुगतान  
 बैंक आम कस्टमर के साथ व्यवसायियों को भी दूसरे एकाउंट में पैसा ट्रांसफर करने पर सर्विस चार्ज वसूला जा रहा है। यही वजह है कि कारोबारी अपनी मोटी रकम अपने घरों में रखना उचित समझ रहे हैं। उधर, बैंकों का मानना है कि बैंक से दो हजार और पांच सौ रुपये के बड़े नोट निकलने के बाद वापस नहीं आ रहे हैं। वे नोट बाजार में रुक जा रहे हैं। बैंकों में ट्रांजेक्शन चार्ज अधिक होने से ग्राहक बैंक में पैसा नहीं जमा कर रहे हैं।  यहां बता दें कि निजी और सरकारी बैंकों ने कैशलेस व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए बैंकिंग नियमों में कई बड़े बदलाव किए हैं, जिसमें सरकारी बैंकों में दूसरे अकाउंट में 10 हजार रुपये जमा करने पर 30 से 45 रुपये तक का सर्विस चार्ज लगता है। वहीं निजी बैंकों में दूसरे अकाउंट में 10 हजार रुपये जमा करने पर 100 से 150 रुपये चार्ज लिया जा रहा है। 

आपूर्ति होने वाले नोटों का सर्कुलेशन (अनुमानित)
नोट                    प्रतिशत
दो हजार               20-25
पांच सौ                60-65
दो सौ                  70-80
सौ                      80-90
पचास                  85-95
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