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सावधान! कभी भी जमीन में धंस सकता है ये फ्लाईओवर

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बरेली। बाइस सौ करोड़ का सीतापुर फोरलेन के निर्माण का प्रोजेक्ट तबाह होने की कगार पर पहुंच गया है। इस प्रोजेक्ट का कॉन्ट्रैक्ट लेने वाली इरा कंपनी के सैकड़ों करोड़ समेटकर फरार होने के बाद एनएचएआई अफसर भी इस हाईवे की मरम्मत के नाम पर करोड़ों रुपये खपा चुके हैं, लेकिन फिर भी हाईवे और बदहाल होता जा रहा है। इस बारिश में द्वारिकेश चीनी मिल के पास बनाए गए फ्लाईओवर के नीचे की मिट्टी भी बह गई है। फ्लाईओवर अब इस हालत में पहुंच गया है कि कभी भी धंस सकता है। हालांकि खतरा देखते हुए इस फ्लाईओवर को पहले ही बंद कराया जा चुका है। उधर, फरीदपुर बाईपास पर भी मिट्टी कट रही है। कुछ दिनों पहले एनएचएआई अफसरों ने फ्लाईओवर और एप्रोच रोड पर लोगों को अलर्ट करने के लिए व्हाइट पेंट कराया था, मगर हादसों का खतरा फिर भी कम नहीं हुआ है।
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बरेली से सीतापुर के बीच आधा-अधूरा बना यह हाईवे इस बात की मिसाल बन गया है कि बड़ी परियोजनाएं किस कदर भ्रष्टाचार का शिकार बनी हैं। तीन सालों से इस हाईवे की हालत दिन ब दिन खराब हो रही है। फरीदपुर टोल प्लाजा के पास कई बड़ी दुर्घटनाओं के बाद एनएचएआई की टीम ने स्पीड ब्रेकर बना दिए थे। कुछ दिन पहले ड्राइवरों को अलर्ट करने के लिए चेतावनी बोर्ड भी लगाया था, लेकिन लापरवाही का आलम यह है कि हाईवे के एक साइड में पड़ी मिट्टी को अब भी नहीं हटाया गया है। फरीदपुर बाईपास की स्थिति तो पहले से ही खराब थी, अब इससे आगे द्वारिकेश चीनी मिल के पास बने फ्लाईओवर की साइड की काफी मिट्टी भी बारिश में बह गई है। इस वजह से फ्लाईओवर की सड़क पर कई जगह कोलतार की लेयर तक टूट गई है। हालत यह है कि कभी भी फ्लाईओवर की पूरी सड़क जमींदोज हो सकती है।
इस फ्लाईओवर का टूटना-दरकना पिछले साल ही शुरू हो गया था। खतरा देखते हुए इस पर ट्रैफिक नहीं गुजारा जा रहा है। इसकी सर्विस लेन की स्थिति भी खराब है। यहां भी कई जगहों पर गड्ढे हो गए थे। कुछ दिन पहले यहां पैच लगाए गए थे, लेकिन अब ये पैच भी उधड़ रहे हैं। हाईवे पर गड्ढे भरने के नाम पर मिट्टी का पटान किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि बारिश में इससे कीचड़ होगा तो हादसों का खतरा बढ़ेगा। साथ ही हैवी ट्रैफिक गुजरने से यह मिट्टी फिर बह जाएगी। यही हाल आगे फतेहगंज पूर्वी के पास भी हाईवे का है। एनएचएआई के अधिकारियों का दावा है कि हाईवे पर लगातार निगरानी रखने के साथ खतरनाक गड्ढों को भरवाया जा रहा है।
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इरा कंपनी पर पुलिस भी नर्मदिल
लखनऊ हाईवे के प्रोजेक्ट पर अरबों रुपये बहाने के बाद आधा-अधूरा काम छोड़कर भागने वाली इरा कंपनी के खिलाफ एनएचएआई के अफसरों ने लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं की। हाईवे की दुर्दशा होने के बाद जब मामला ऊपर तक पहुंचा तो शासन के सख्ती दिखाने के बाद जुलाई 2018 में थाना फरीदपुर में कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। फरीदपुर पुलिस ने भी एफआईआर तो दर्ज कर ली लेकिन तफ्तीश करने या इरा कंपनी के जिम्मेदार अफसरों पर शिकंजा कसने की कोशिश नहीं की। एफआईआर दर्ज होने के साल भर बाद भी पुलिस न तो इरा कंपनी के किसी अधिकारी को गिरफ्तार कर सकी न पूछताछ करने जैसी औपचारिकता पूरी कर पाई। बताया जाता है कि सिर्फ एक बार पुलिस की एक टीम कंपनी के एक मैनेजर को पकड़ने के लिए दिल्ली गई थी लेकिन वहां से खाली हाथ लौट आई। इसके बाद यह केस फाइलों में दफन होकर रह गया। पुलिस अधिकारियों ने एक्शन लेने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। नतीजा यह हुआ कि सरकार का अरबों रुपया हड़पकर भागी इरा कंपनी से यह रकम वसूल होने का अब कोई आसार नजर नहीं आ रहा है।
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