डेंगू और मलेरिया के मामले सामने आने के बाद शासन ने अलर्ट जारी कर दिया है। डीएम नितीश कुमार ने बताया कि इसकी रोकथाम के लिए सीएचसी और पीएचसी में फीवर डेस्क बनाई गईं हैं। कोविड कमांड एवं कंट्रोल सेंटर के जरिये कोविड की तरह ही डेंगू और मलेरिया की निगरानी की जाएगी।
डीएम ने लोगों से अपील की है कि कूलर और गमलों समेत किसी भी जगह पानी का जमाव न होने दें। बच्चों को पूरी आस्तीन की शर्ट और पैंट पहनाएं। गांवों में आशा वर्कर और शिक्षक जागरूकता अभियान चला रहे हैं। नगर निकायों के सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ ही लार्वा नाशक का छिड़काव करने के निर्देश दिए गए हैं।
पिछले साल भमोरा ब्लॉक के गांव मजनूपुर में डेंगू के आठ केस मिले थे। इस वजह से अभी से सतर्कता पर जोर दिया जा रहा है। ग्राम पंचायतों में दवा का छिड़काव, झाड़ियों का कटान कराया जा रहा है। इसके अलावा स्कूलों की छतों पर जमा पानी की निकासी के लिए शिक्षकों को नोडल अफसर बनाकर इसकी जिम्मेदारी दी गई है।
सीएचसी को दी र्गइं जांच किट
डीएम ने बताया कि डेंगू की जांच के लिए सभी सीएचसी को 20-20 एनएस-1 किट उपलब्ध करा दी गई हैं। कोई भी संदिग्ध मरीज किट से जांच में पॉजिटिव पाया जाएगा तो लखनऊ से जांच कराकर उसकी पुष्टि की जाएगी। इसके अलावा जिला अस्पताल में डेंगू पीड़ितों के लिए 20 और सभी सीएचसी पर पांच-पांच बेड आरक्षित कर दिए गए हैं।
तीन ब्लॉकों पर विशेष नजर
प्रेसवार्ता के दौरान डीएम ने बताया कि वर्ष 2018 में मलेरिया के लगभग 35 हजार, 2019 में 46 हजार और 2020 में करीब 11 हजार मामले सामने आए थे। इस बार अब तक 1453 केस मिल चुके हैं। मझगवां, रामनगर और आलमपुर जाफराबाद ब्लॉकों में पूर्व में ज्यादा केस मिलने के चलते विशेष नजर रखी जा रही है। इस दौरान एसएसपी रोहित सिंह सजवाण, सीडीओ चंद्रमोहन गर्ग, एसडीएम सदर विशु राजा, सीएमओ डॉ. बलवीर सिंह आदि मौजूद रहे।