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सेहत हो रही खराब.. सब्जियां केमिकल से चमकाने-रंगने पर कुछ नहीं करते साहब

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Health is getting worse .. Vegetables do nothing on polishing and coloring with chemicals, sir
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बरेली। यह सुनकर आपको थोड़ा झटका तो लगेगा लेकिन सच यही है कि सब्जी मंडी से जो सब्जियां आप ताजा समझकर खरीदते हैं, वह अक्सर ताजा नहीं होतीं। जो सब्जियां सड़ने के कगार पर होती हैं, उन्हें भी थोक सब्जी मंडी में केमिकल और रंगों का इस्तेमाल कर ऐसा रंगा और चमकाया जाता है कि शहर की मंडियों में वह हाथोंहाथ बिक जाती हैं। किसी को खबर तक नहीं होती कि यही सब्जियां उन्हें अक्सर अस्पताल का रास्ता तक दिखा देती हैं। उधर, एफएसडीए का हाल यह है कि पांच महीने पहले तेजाब से अदरक चमकाने का मामला पकड़ने के बाद भी उसे दबा दिया। हाल ही में केमिकल भरे ड्रमों की भी जांच नहीं की।
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डेलापीर की थोक सब्जी मंडी में सिर्फ ताजी सब्जियां ही नहीं बिकतीं। सब्जी अगर पूरी तरह सड़ी और खराब नहीं है, तब भी उसका कुछ न कुछ रेट लग ही जाता है। फड़ों पर आढ़त लगाने वाले तमाम कारोबारी इन सब्जियों का हुलिया बदलने में भी माहिर हैं। कुछ केमिकल और रंगों का इस्तेमाल इन सब्जियों को ऐसे चमकाया जाता है कि वह काफी हद तक ताजा दिखने लगती हैं। लोग उनकी चमक देखकर उन्हें खरीद ले जाते हैं और कारोबारियों की थोड़ी सी मेहनत के बाद ये सब्जियां उन्हें तो अच्छा-खासा मुनाफा दे जाती हैं लेकिन खाने वाले की सेहत पर काफी भारी पड़ती हैं। मंडी के कई कारोबारियों का कहना है कि मंडी में चल रहा यह गोरखधंधा जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी से चल रहा है और इसके उनका कारोबार भी खराब हो रहा है।
कारोबारियों के इस आरोप की पुष्टि इस बात से भी होती है कि एफएसडीए की ओर से मंडी में कोई नियमित जांच ही नहीं की जाती। पांच महीने पहले एफएसडीए ने एक आढ़त में अदरक चमकाने के लिए तेजाब और कुछ और केमिकल पकड़े थे। मुख्यालय तक इसकी रिपोर्ट भी भेजी गई लेकिन असल में न तेजाब और केमिकल के सैंपल लिए न कारोबारी पर कोई कार्रवाई की जबकि मंडी प्रशासन लगातार तेजाब से अदरक चमकाने की सूचना देकर एफएसडीए से जांच और कार्रवाई करने का आग्रह कर रहा था। शनिवार को जब मंडी में केमिकल भरे ड्रम मिले तब भी फोन करने के साथ पत्र लिखने के बावजूद एफएसडीए ने कोई कार्रवाई नहीं की। अब मंडी के कारोबारी ही कह रहे हैं कि एफएसडीए अफसरों ने जानबूझकर कारोबारी को केमिकल भरे ड्रम गायब करने का मौका दे दिया।
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भोगेंद्र है नाम.. मंडी में करते ही नहीं कुछ काम
मंडी प्रशासन के अधिकारियों के साथ कुछ कारोबारी भी इलाके के खाद्य सुरक्षा अधिकारी भोगेंद्र कुमार को मंडी में लगातार चल रहे घालमेल के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। मंडी के अफसर कह रहे हैं कि वक्त-वक्त पर एफएसडीए अफसरों को खुद आकर जांच करनी चाहिए लेकिन वे कभी नहीं आते। शनिवार को जब केमिकल भरे ड्रम मिले तो भोगेंद्र को फौरन फोन पर सूचना देने के साथ जिला अभिहित अधिकारी को पत्र भी लिखा गया लेकिन कोई कार्रवाई करने नहीं आया। मंडी सचिव अनिल कुमार ने बताया कि पांच महीने पहले तेजाब मिला था, लेकिन तब भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। कारोबारी को भी छोड़ दिया गया।
मंडी सचिव चाहते हैं- एफएसडीए सभी फर्मों की जांच करे
मंडी सचिव अनिल कुमार ने जिला अभिहित अधिकारी धर्मराज मिश्रा को पत्र लिखकर कहा है कि जनहित में मंडी में नियमित नमूने भरे जाएं। उन्होंने पत्र में लिखा है कि सभी फर्मों के स्टॉक और कारोबार की शत प्रतिशत जांच जरूरी है। सचिव ने नमूने लेने के बाद लैब से उनकी रिपोर्ट मिलने पर उसे सार्वजनिक करने को भी कहा है। पत्र मिलने के बाद से एफएसडीए कार्यालय मेें अफरातफरी मची हुई है क्योंकि टीम ने एक भी नमूना अर्से से नहीं भरा है, इससे खराब फल-सब्जी बेचने और केमिकल से रंगने-चमकाने का धंधा बदस्तूर चल रहा है।
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