भोजीपुरा के एक गांव की 18 वर्षीय किशोरी 13 अक्तूबर की शाम भोजीपुरा सीएचसी से जिला अस्पताल रेफर की गई थी। उसे सांस लेने संबंधी दिक्कत थी तो उसे आइसोलेशन वार्ड में भेज दिया गया। अगले दिन उसे महिला अस्पताल लाया गया। मरीजों ने ही बताया कि लड़की कई महीने के गर्भ से थी, बच्चा उसी का है।
वहीं, इस मामले में सीएमएस अलका शर्मा कहती हैं कि कुछ दिन पहले स्टाफ ने उन्हें ऐसी लड़की के आने के बारे में सूचना दी थी। लड़की गर्भवती थी पर उसके साथ कोई अभिभावक नहीं था। डॉक्टर ने अभिभावक बुलाने को कहा तो लड़की ने हंगामा किया। डॉक्टर ने कॉल करके उनसे पूछा तो उन्होंने सलाह दी कि उसे भर्ती कर लो, लेकिन फिर लड़की कहीं चली गई।
अस्पताल में पहले भी हो चुकीं हैं घटनाएं, सुरक्षा बंदोबस्त नाकाफी
महिला अस्पताल में वर्ष 2013 में बच्चा चोरी की घटना हुई थी। तब तत्कालीन सीएमएस स्नेहलता ने डीएम से सुरक्षा पुख्ता कराने की मांग की। डीएम ने 12 महिला होमगार्ड जिला अस्पताल को आवंटित कर दीं। सीएमएस के मुताबिक अब केवल 10 होमगार्ड ही तैनात हैं।
रात में तीन से चार होमगार्ड अलग-अलग वार्ड में रहती हैं। उनके मुताबिक अस्पताल में 16 सीसीटीवी कैमरे हैं जो सही काम कर रहे हैं। बता दें कि दो महीने पहले ही अपने बच्चे की मौत के बाद एक महिला ने अस्पताल की तीसरी मंजिल से कूदकर जान दे दी थी।