एटीएस (एंटी टेररज्मि स्क्वॉड) टीम टेरर फंडिंग मामले में रिमांड पर मिले चारों आरोपियों को लखनऊ ले गई। वहां एटीएस के उच्च अफसरों के अलावा एनआईए और आईबी के अधिकारी भी आरोपियों से पूछताछ करेंगे।
निघासन थाना पुलिस और एटीएस ने टेरर फंडिंग गिरोह का 11 अक्तूबर को खुलासा करते हुए चार लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें इज्जतनगर (बरेली) के गांव परतापुर चौधरी निवासी उम्मेद अली व समीर सलमानी उर्फ बदरुद्दीन और तिकुनियां (लखीमपुर खीरी) के संजय अग्रवाल व एराज अली शामिल हैं।
निघासन के पलिया बस अड्डे से उन्हें गिरफ्तार किया जाना बताया गया था। सोमवार को यूपी एटीएस टीम के डीएसपी शैलेंद्र कुमार सिंह ने कोर्ट से सात दिन का कस्टडी रिमांड लेकर आरोपियों से पूछताछ की।
एटीएस के एएसपी दिनेश यादव ने भी आरोपियों से अलग-अलग पूछताछ की जिससे जांच एजेंसी के हाथ कई महत्वपूर्ण सुराग लगे। अगले दिन मंगलवार को एटीएस टीम पहले चारों आरोपियों को लेकर तिकुनियां कस्बे पहुंची और फिर नेपाल बॉर्डर पर गई जहां की भौगोलिक स्थिति देखी।
सूत्रों के मुताबिक मंगलवार की रात ही टीम आरोपियों को लेकर लखनऊ चली गई। सूत्रों के मुताबिक एटीएस की दो दिन की जांच में कुछ अहम तथ्य मिले हैं जिन पर टीम ने अपनी जांच तेज कर दी है। टीम आरोपियों को लेकर बरेली और दिल्ली भी जा सकती है।
नेपाल पुलिस ने सौंपे दस्तावेज
नेपाल के एक बैंक की वेबसाइट को हैक कर 49 लाख रुपये निकालने के मामले में नेपाल पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की थी। इस मामले में एक महिला समेत तीन लोगों को नेपाल पुलिस ने गिरफ्तार किया था। तीनों आरोपी इस समय काठमांडू जेल में हैं।
टेरर फंडिंग की रकम नेपाल से भारत लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले ग्राम डांगा (तिकुनियां) के मुमताज की नेपाल पुलिस भी तलाश कर रही है। रिमांड लेने के बाद यूपी एटीएस 49 लाख रुपये से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज नेपाल पुलिस से लेने के बाद अब इन लोगों के हैंडलर से कनेक्शन खंगालने में जुट गई है।
छह दिन बाद भी पकड़ में नहीं आया सरगना मुमताज
टेरर फंडिंग के मामले में नेपाल से नोट लाने और बदलवाने वाला मुमताज छह दिन बाद भी पुलिस के हाथ नहीं लगा है। उसकी तलाश में जिला पुलिस की स्वॉट (स्पेशल वेपन्स एंड टैक्टिक्स) टीम जुटी है। टीमों ने सीमा से सटे गांवों में संभावित स्थानों पर छापे भी मारे लेकिन वह हाथ नहीं लग सका।