जिसे बोरे में बंद करके डाला, वो करोड़पति परिवार में पहुंचा
नवाबगंज में पिछली साल खेत में शौच को गई महिला को एक बच्चा बोरे में बंद मिला था। बच्चे के मुंह में कपड़ा ठूंसा गया था। बस जान ही बाकी थी। संस्था से बच्चे को भी हैदराबाद के करोड़पति बिजनेसमैन ले गए हैं। दो कुंवारी युवतियों ने भी बच्चे गोद लिए हैं। नारी निकेतन की तीन मानसिक मंदित महिलाओं के बच्चे भी हैदराबाद, तेलंगाना और रुद्रपुर के बड़े परिवारों का हिस्सा बने हैं। भमोरा में नाले के किनारे मिली बच्ची भी बड़े घर में गई है।
बेटियों को अपनाने वाले सबसे ज्यादा: प्रिमरोज
संस्था में इस समय 13 अनाथ बच्चे हैं जिन्हें अभिभावकों को सौंपा जाना है। इनमें आठ बच्ची और पांच बच्चे हैं। संस्था प्रभारी के मुताबिक लावारिस मिलने वाले बच्चों में बेटियों की संख्या हमेशा ज्यादा रहती है पर दूसरा सुखद पहलू ये भी है कि अभिभावक भी बेटियां ही मांग रहे हैं।
भिखारी से मिले यासीन को नाम मिला आशीष
चार दिन पहले ट्रेन में भिखारी के पास मिले डेढ़ साल के बच्चे को देखकर लोगों ने शोर मचाया था। पुलिस ने तब भिखारी और बच्चे को कब्जे में ले लिया था। बाद में भिखारी पुलिस को गच्चा देकर भाग गया। बाल कल्याण समिति ने इस बच्चे को संस्था के हवाले कर दिया। यहां के स्टाफ से बच्चा घुलमिल गया है। उसका नाम यासीन बताया जा रहा था पर अब इसे लोग आशीष बोल रहे हैं।
चाइल्ड लाइन ने नहीं दी जानकारी: डीएन शर्मा
बाल कल्याण समिति के कार्यवाहक प्रभारी डीएन शर्मा ने बताया कि उन्होंने अखबारों में ही बच्ची के मिलने की खबर पढ़ी थी। उन्हें अभी तक चाइल्ड लाइन ने कोई सूचना नहीं दी है। वे इसमें लापरवाही की जांच करेंगे। साथ ही खुद बच्ची को देखने जाएंगे। उसके सही होते ही संस्था में भेजा जाएगा।