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चंद्रग्रहण का प्रभाव: महिला अस्पतालों में 70 प्रतिशत कम दर्ज हुई ओपीडी

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बरेली। जमाना भले ही कितनी भी तेज भाग रहा हो लेकिन पुरानी मान्यताओं पर भरोसा अब भी कायम है। मंगलवार को शहर भर के महिला अस्पतालों के हालात ने इसी की पुष्टि की। जिन महिला अस्पतालों में आम तौर पर अपनी बारी आने का घंटों इंतजार करना पड़ता है, वे पूरे दिन सन्नाटे में डूबे रहे। चंद्रग्रहण की वजह से गर्भवती महिलाओं ने डॉक्टरों की खुशामद कर प्रसव टाल दिए तो दूसरी तरफ ओपीडी में भी गिनी-चुनी महिलाएं ही पहुंचीं। जिला महिला अस्पताल में तो एक भी प्रसव नहीं हुआ। महिलाओं को अंदेशा था कि चंद्रग्रहण के दिन प्रसव हुआ तो इसका असर उनकी संतान पर पड़ सकता है। डॉक्टरों ने इसे अंधविश्वास बताकर उन्हें लाख समझाने की कोशिश की, लेकिन वे प्रसव कराने के लिए तैयार नहीं हुईं।
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प्राइवेट और सरकारी महिला अस्पतालों में मंगलवार की ओपीडी में मरीजों की आमद 70 प्रतिशत तक कम रही। अस्पतालों में जो गर्भवती महिलाएं पहले से भर्ती थीं, उन्होंने और उनके परिवार वालों ने सूतक लगते ही प्रसव कराने से इनकार कर दिया। डॉक्टरों ने काफी समझाने के बाद भी इक्का-दुक्का महिलाएं ही प्रसव कराने के लिए तैयार हुईं। कुछ ऐसी महिलाओं के भी प्रसव हुए जिनकी हालत क्रिटिकल थी। मगर ज्यादातर महिलाओं और उनके परिवार वालों ने साफ कह दिया कि वे अब बुधवार को ही प्रसव कराएंगे। आखिरकार डॉक्टरों को भी उनकी जिद के आगे समर्पण करना पड़ा।

मान्यता.. चंद्रग्रहण में पैदा हुआ बच्चा झेलता है कष्ट
अस्पतालों में भर्ती महिलाओं ने बातचीत में बताया कि पुरानी मान्यता है कि चंद्रग्रहण के दौरान अगर किसी बच्चे का जन्म होता है तो उसे जिंदगी भर रोग, कष्ट और दरिद्रता झेलने के साथ मृत्यु जैसा कष्ट होने का भय रहता है। इसी वजह से वे चंद्रग्रहण के दिन प्रसव नहीं कराना चाहतीं। गायनी एसोसिएशन की अध्यक्ष डॉ. भारती सरन ने बताया कि चंद्र ग्रहण, सूर्य ग्रहण और अमावस्या तीनों पर हिंदू धर्म की महिलाएं ओपीडी में नहीं आती हैं। इन दिनों में 70 प्रतिशत तक ओपीडी प्रभावित हो जाती है। उन्होंने बताया कि चंद्र ग्रहण के कारण पहले से भर्ती मरीजों ने भी सूतक लगने से पहले या चंद्रग्रहण के बाद प्रसव कराने की मंशा जताई थी। उन्हें चंद्रग्रहण की हकीकत बताई गई लेकिन फिर भी वे नहीं माने। हंगामा न हो इसलिए जहां संभव था वहां प्रसव नहीं कराया गया लेकिन जहां स्थिति ठीक नहीं थी, वहां उनके परिजनों को विश्वास में लेकर प्रसव कराना पड़ा।
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जिला महिला अस्पताल में एक भी प्रसव नहीं
चंद्रग्रहण का असर सरकारी अस्पतालों में भी दिखाई दिया। जिला महिला चिकित्सालय में आमतौर पर रोजाना करीब साढ़े तीन सौ महीज पहुंचती हैं लेकिन मंगलवार को ओपीडी में सिर्फ 210 महिलाएं ही पहुंचीं। सीएमएस डॉ. अलका सक्सेना के मुताबिक्र ग्रहण में गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर निकलने की भी मनाही होती है, इसलिए ज्यादातर मरीजों के घरवाले ही दवा रिपीट कराने पहुंचे। उन्होंने बताया कि अस्पताल में रोजाना जहां 4-5 प्रसव होते हैं लेकिन मंगलवार को एक भी प्रसव नहीं हुआ।
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