बरेली। पॉवर कॉरपोरेशन के चीफ इंजीनियर एसके सक्सेना को बृहस्पतिवार को अचानक गोंडा में तैनाती का आदेश मिला तो विभाग में हलचल शुरू हो गई। इसके बाद शुक्रवार देर रात यहां पहुंचे तारिक मतीन ने प्रबंधन का आदेश बताते हुए रात में ही एसके सक्सेना से चार्ज लेने की कोशिश की तो सवाल उठने लगे। मामला चेयरमैन तक पहुंचा तो आनन-फानन में गोंडा में दूसरे अधिकारी की तैनाती कर दी गई। इसके बाद इस पर भी असमंजस पैदा हो गया कि एसके सक्सेना को अब बरेली में ही रोका जाएगा या नई तैनाती दी जाएगी।
दरअसल, पॉवर कॉरपोरेशन में तबादले और तैनाती दोनों पर इन दिनों एक के बाद एक विवाद सामने आ रहे हैं। इसी कारण बरेली जैसे सबसे ज्यादा राजस्व देने वाले जोन के चीफ को गोंडा जैसे छोटे शहर में तैनाती देने पर भी सवाल खड़े हो गए। अचानक ट्रांसफर से सकते में आए एसके सक्सेना से चार्ज लेने शुक्रवार रात करीब साढ़े नौ बजे नए चीफ इंजीनियर तारिक मतीन पहुंचे तो जद्दोजहद शुरू हो गई। तारिक को प्रबंधन ने रात दस बजे तक चार्ज लेने का निर्देश दिया था। इस पर भी सवाल उठे कि प्रबंधन रात में ही क्यों चार्ज दिलाना चाहता है। हालांकि तारिक मतीन ने यह भी कहा कि वह जल्दबाजी में नहीं हैं। यह प्रबंधन का ही निर्देश है।
हालांकि इसके बावजूद मामला चेयरमैन कार्यालय पहुंच गया। प्रबंधन के रात में चार्ज लेने के निर्देश पर सवाल उठे तो अफसर बैक फुट पर आ गया। आनन-फानन में गोंडा जोन में रामस्वरुप को चीफ इंजीनियर बना दिया। इसके बाद अब एसके सक्सेना को नया आदेश आने का इंतजार है। बता दें कि काफी समय से पॉवर कारपोरेशन में बिलों में हेराफेरी, नए कनेक्शनों में वसूली, स्टोर में भ्रष्टाचार, सौभाग्य योजना में मनमानी जैसे मुद्दे छाए हुए हैं। कई मामलों की जांच भी चल रही है लेकिन इनका नतीजा नहीं निकल पा रहा है। ट्रांसफर-पोस्टिंग के साथ इन मसलों पर भी सवाल उठ रहे हैं।