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प्लाज्मा दान कर इन्होंने निभाया फर्ज... आप भी आगे आइए

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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तमाम युवाओं ने अनजान लोगों को प्लाज्मा डोनेट कर पेश की मानवता की मिसाल

बरेली। कोरोना काल में प्लाज्मा थेरेपी उपचार में काफी कारगर सिद्ध हो रही है। ऐसे में तमाम लोगों ने जाति-धर्म और जान-पहचान के बंधन को दरकिनार कर अनजान लोगों को प्लाज्मा डोनेट कर मानवता की अनूठी मिसाल पेश की है। अगर आप भी कोरोना संक्रमित होने के बाद ठीक हो चुके हैं तो संक्रमित लोगों की मदद के लिए आगे आइए और प्लाज्मा डोनेट कीजिए।

‘मैं बंगलूरू में सिटी बैंक में काम करता हूं। कोरोना संक्रमण के चलते इन दिनों वर्क फ्रॉम होम कर रहा हूं। तीन दिन पहले मुझे एक परिचित के जरिये पता लगा कि किसी व्यक्ति को प्लाज्मा की जरूरत है तो मैंने ब्लड बैंक जाकर प्लाज्मा डोनेट कर दिया।’ - उदित खंडेलवाल, राजेंद्रनगर

‘ कोरोना से ठीक होने के बाद मैंने फेसबुक पर डाल रखा था कि किसी को प्लाज्मा चाहिए तो मुझसे संपर्क करें। इसके बाद एक डॉक्टर और एक पुलिसकर्मी के लिए प्लाज्मा की जरूरत हुई तो मुझसे संपर्क किया गया। मंगलवार को मैंने दोनों व्यक्तियों के लिए एकसाथ ही प्लाज्मा डोनेट किया। - मोहित अग्रवाल, इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबारी

दोस्त की जान तो नहीं बची मगर दो और को मिल गई जिंदगी

बरेली। शहर के दो युवाओं ने दोस्त की जान बचाने को प्लाज्मा दान किया। हालांकि दोस्त की मौत उससे पहले ही हो गई मगर उनके प्लाज्मा से दो और को जिंदगी मिल गई।
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राजेंद्र नगर के मानस और माधव वरिष्ठ आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अरविंद अग्रवाल और वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरा अग्रवाल के पुत्र हैं। माधव (26) कैमिकल इंजीनियर और मानस (21) एमबीबीएस के छात्र हैं। एक सप्ताह पहले मानस के दोस्त कोरोना संक्रमित हुए। वह एक निजी अस्पताल में भर्ती हुआ। डाक्टर ने उन्हें प्लाज्मा चढ़ाने को कहा। मानस और माधव ने आईएमए ब्लड बैंक में प्लाज्मा दे दिया, इसके बाद उन्होंने दोस्त के पिता को फोन किया लेकिन तब तक दोस्त की जान जा चुकी थी। बाद में मानस और माधव के प्लाज्मा से दो और लोगों की जान बचाई गई। संवाद
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