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हसीन शख्सियत थे हसनी मियां

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हसनी मियां के जनाजे की नमाज में शामिल अकीदतमंद। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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दर से कोई खाली नहीं जाता, हमेशा दिया मोहब्बत का पैगाम

बरेली। खानकाह नियाजिया के सज्जादा नशीन शाह हसनैन उर्फ हसनी मियां के दर से कभी कोई खाली नहीं जाता था। वह एक सूफी, रूहानी और हसीन सख्सियत थे। उन्होंने हमेश इत्तहाद और मोहब्बत का पैगाम दिया। इसी लिए विदेशों तक लाखों मुरीद हैं।
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खानकाह के 40 साल तक सज्जादा रहने के दौरान हसनी मियां ने दीन दुनिया की नायाब तरीके से खिदमत की। न कभी किसी की जाति पूछी न कभी किसी का मजहब। बस लोगों की बेलौस खिदमत करते रहे। उनके भाई जाहिद मियां ने बताया कि उनके पास तमाम ऐसे लोग आया करते थे जो हर तरफ से न उम्मीद हो जाते थे। चाहे वह घरेलू परेशानियों में हो या किसी मर्ज में मुब्तिला हों। उनके रुहानी इलाज से तमाम लोगों को फैज हासिल होता। उनके भाई जाहिद मियां नियाजी ने बताया कि हसनी मियां हमेशा लोगों की मद्द किया करते थे, लंगर करते रहते थे। हर हफ्ते जुमे (शुक्रवार) को एक से डेढ़ लाख रुपये जरूरतमंदों को बांट दिया करते थे। कई घरों के खानपान और उनके बच्चों की पढ़ाई लिखाई पर खर्च करते, स्कूल की फीस तक भरा करते थे।

आखिरी सफर में कई खास लोग पहुंचे

बरेली। शाह हसनी मियां के इंतेकाल पर कई जाने माने लोग भी पहुंचे। इसमें मुरादाबाद के सांसद एसटी हसन, पिलखना के चेयरमैन अब्दुर्रशीद, खानकाह वामिकिया निशातिया के सज्जदानशीन सैय्यद मोहम्मद असलम मियां वामिकी सहित तमाम लोग जनाजे में शामिल हुए। इसके अलावा कई फनकारों सहित दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, आगरा और तमाम शहरों के लोग भी पहुंचे।
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