कोलकाता में हुई मुठभेड़ में यूपी की एसटीएफ ने बबलू के चार साथियों को मारकर तोड़ी थी पूरे गिरोह की कमर
बरेली। डीआईजी राजेश पांडेय ने लॉकडाउन के दौरान शुरू की गई अपनी वीडियो सीरीज में इससे पहले शिवप्रकाश शुक्ला एनकाउंटर से जुड़े अनछुए पहलू बताए थे, अब डॉन ओमप्रकाश उर्फ बबलू श्रीवास्तव और उसके साथियों के कारनामे बता रहे हैं। रोज रात में वह करीब आधा घंटे का वीडियो बनाकर यूट्यूब पर अपलोड करते हैं। बबलू और उसके साथी मंगेश उर्फ मंगे व कमलकिशोर सैनी 1999 से यहां सेंट्रल जेल में बंद हैं। नैनी जेल से इन्हें प्रशासनिक आधार पर बरेली जेल ट्रांसफर किया गया था। पुणे के एसीपी एलडी अरोड़ा की हत्या के मामले में यह लोग सजा पा चुके हैं, कई और मामलों में दिल्ली, लखनऊ व अलग राज्यों में तारीख पर जाते रहते हैं।
डीआईजी ने बताया कि 22 सितंबर 1998 को शिवप्रकाश के एनकाउंटर के बाद यूपी एसटीएफ का देश भर में नाम हुआ था। छह सितंबर को गुजरात के भुज निवासी नमक व्यवसायी बाबूराम सिंघवी के अपहरण की कोशिश हुई थी। वहां पुलिस को दो मोबाइल मिले जिनसे पता लगा कि लखनऊ से घटना का लिंक है। तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री लालकृष्ण आडवानी भुज से सांसद थे। यूपी एसटीएफ को गुजरात की घटना में लगाया गया कि कहीं शिवप्रकाश या उसके गैंग ने तो नहीं कराई। पता लगा कि बबलू श्रीवास्तव ने लखनऊ के नए अपराधियों से यह अपहरण कराने की कोशिश की थी।
गैंग को ट्रेस करते एसटीएफ लखनऊ टीम कलकत्ता पहुंची। वहां एक नामी होटल मालिक एचडी पूनवानी के अपहरण की कोशिश में बबलू गैंग से सीधी मुठभेड़ हुई। इसमें बबलू गैंग के चार साथी मारे गए। जबकि मंगे और सत्यप्रकाश सत्ते के कई गोलियां लगीं और यह बच गए। यहीं से बबलू गैंग का सफाया शुरू हो गया। डीआईजी ने बताया कि बबलू खुद को फंसाया हुआ दिखाने की कोशिश करता है पर वास्तव में ऐसा नहीं है। वह बेहद शातिर दिमाग अपराधी है जिसका दाऊद ने भी भरपूर इस्तेमाल किया। मुंबई बम ब्लॉस्ट के बाद दोनों की राहें जुदा हो गईं। बबलू ने सीतापुर से लोकसभा चुनाव को आवेदन किया पर एक मामले में सजा के बाद आयोग ने उसका नामांकन निरस्त कर दिया। बबलू की तमन्ना राजनेता बनने की थी जो अब जेल में ही दफन हो जाएगी।
पेशी के दौरान बताता है बबलू का अंदाज अंडरवर्ल्ड का रुतबा अब भी है कायम
कई सालों से बबलू श्रीवास्तव और उसके साथी मंगे और सैनी सेंट्रल जेल में कैद हैं। गाहे-बगाहे यह बात सुर्खियों में रहती है कि बबलू एंड कंपनी को जेल में भी वीआईपी ट्रीटमेंट मिलता है। वैसे तो जेल प्रशासन इसे नकारता रहा है लेकिन जब भी पेशी पर जाने के लिए जेल से बाहर निकलता है, उसका अंदाज बता देता है कि जेल में भी उसका डॉन होने का रुतबा कम नहीं हुआ है।
जेल प्रशासन का दावा है कि दूसरे कैदियों की तरह बबलू और उसके दोनों साथियों से भी जेल के नियमों का पूरी तरह पालन कराया जाता है। तीनों लोग सुबह साढ़े छह तक उठ जाते हैं और आठ बजे तक दूसरे कैदियों के साथ उन्हें नाश्ता दे दिया जाता है जिसमें ब्रेड तो कभी दलिया जैसी चीजें होती हैं। दोपहर में भी उन्हें जेल के मेन्यू के मुताबिक दाल-रोटी और सब्जी दी जाती है। इन दिनों दोपहर डेढ़ बजे कैदियों को आम का पना भी दिया जाता है। तीन बजे चाय या काढ़ा मिलता है। शाम पांच बजे फिर दाल-रोटी और सब्जी दी जाती है।
खुद जेल के अधिकारी बताते हैं कि बबलू और उसके साथी अक्सर खाना लेकर रख लेते हैं और दूसरे कैदियों के मुकाबले थोड़ा देरी से खाते हैं। हालांकि बबलू एंड कंपनी के चेहरों की चमक कुछ और ही बयां करती है। उनका रहन-सहन भी आम कैदियों से अलग नजर आता है। जब भी ये तीनों पेशी पर जाते हैं तो उनका अंदाज बताता है कि अंडरवर्ल्ड का रुतबा अब भी काम कर रहा है। हालांकि कुछ साल पहले तक काफी लोग बबलू से मुलाकात करने आते थे लेकिन कुछ साल पहले अदालत के सजा सुनाए जाने के बाद मुलाकात करने वालों की संख्या भी काफी कम हो गई है।