प्रतिवर्ष सरकारी संस्थानों से हो रहा था दस करोड़ का भुगतान
जांच में पता चला कि फर्म की सेवाओं के बदले सरकारी संस्थानों से प्रतिवर्ष 10 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान हो रहा है। अधिक मूल्य संवर्धन वाली कमोडिटी यानी सामान के निर्माता होने के बावजूद फर्म संचालक सभी कर देयता का समायोजन आईटीसी यानी अग्रिम टैक्स भुगतान से कर रहा था। साथ ही, कागजों की गड़बड़ी और बिलों में हेराफेरी के मामले मिले।
आईटीसी क्लेम के लिए बोगस फर्मों से खरीद
जांच में पता चला कि फर्म संचालक द्वारा कर चोरी के उद्देश्य से दिल्ली में सकुर्लर ट्रेडिंग यानी दलाल के जरिये धोखाधड़ी से बोगस फर्मों से खरीदारी दिखाकर आईटीसी क्लेम से देय कर का समायोजन किया गया। पहले तो कारोबारी ने आपत्ति जताई पर जब दस्तावेजों के आधार पर बात की गई तो उसने भूल स्वीकारी।