देहरादून से लौट रहे राज्यपाल रामनाईक शुक्रवार दोपहर बाद साढ़े तीन बजे के करीब बरेली से लखनऊ के लिए उड़ान भरने ही वाले थे कि उनके हेलीकॉप्टर का एक दरवाजा जमीन पर गिर गया। गनीमत थी कि यह गड़बड़ी उड़ान भरने से पहले ही सामने आ गई। राज्यपाल की हिफाजत से जुड़ा मसला होने के नाते लखनऊ तक हड़कंप मच गया। बाद में त्रिशूल एयरबेस पर एयरक्राफ्ट भेजने की व्यवस्था की गई और तीन घंटे यहां फंसे रहने के बाद राज्यपाल 6.28 बजे लखनऊ के लिए रवाना हो पाए।
राज्यपाल रामनाईक को लेकर आया स्टेट हेलीकॉप्टर ईंधन भरवाने के लिए दोपहर तीन बजे बरेली पुलिस लाइंस में रुका। करीब 25 मिनट में ईंधन भरा गया, उसके बाद वह हेलीकाप्टर में बैठे और उनकी तरफ का दरवाजा बंद करके पायलट ने 3.28 बजे हेलीकॉप्टर स्टार्ट कि या। इंडीकेटर चेक किए तो पता चला कि राज्यपाल की ओर का दरवाजा लूज है। पायलट ने इसे दुरुस्त करने की कोशिश की तो वह जमीन पर गिर गया। हड़बड़ाए पायलट ने वहां मौजूद डीएम, एसएसपी से बात की। तय हुआ कि फिलहाल राज्यपाल को गेस्ट हाउस में ठहरा दिया जाए। आला अफसरों ने जानकारी मुख्य सचिव और निदेशक नागरिक उड्डयन को दी। इससे लखनऊ में भी खलबली मच गई। एक के बाद एक राज्यपाल से माफी मांगने के लिए गेस्ट हाउस में मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव नागरिक उड्डयन और मुख्यमंत्री तक के फोन आते रहे। यह जानकारी कमिश्नर, आईजी और डीआईजी को हुई तो वे भी राज्यपाल के पास पहुंचे। एक घंटे बाद तय हुआ कि राज्यपाल को लेने एयरक्राफ्ट त्रिशूल एयरबेस पर आएगा। शाम साढ़े चार बजे वह पुलिस लाइन से त्रिशूल के लिए रवाना हुए। इस दौरान पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों की ड्यूटी राज्यपाल को एयरबेस तक ले जाने के लिए लगा दीं। करीब सवा छह बजे एयरक्राफ्ट त्रिशूल पहुंचा और उन्हें लेकर लखनऊ रवाना हुआ।