मिलती थीं धमकियां पर नहीं मानी हार
कविशा मोटर्स की अध्यक्ष शारदा भार्गव ने बताया कि वर्ष 1960 में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। वर्ष 1980 में महिला उद्यमी बनने का सफर शुरू हुआ। बच्चों की परवरिश के साथ कारोबार संभालने की चुनौतियों के बारे में बताया। कहा कि तब धमकियां भी मिलती थीं पर बगैर डरे उन्होंने खुद को उद्यमी के रूप में स्थापित किया। शुरुआत में 12 सौ रुपये की सैलरी पर काम करने से लेकर दो सौ करोड़ की संपत्ति बनाने तक के बारे में बताया।
पाश्चात्य सभ्यता से रहें दूर
श्रीमद् दयानंद कन्या गुरुकुल चोटीपुरा अमरोहा की आचार्य सुमेधा का कहना था कि विद्यार्थियों का विकास मातृभाषा, सभ्यता और संस्कृति ज्ञान से ही हो सकता है। जो विद्यार्थी ऐसे परिदृश्य में विकसित होते हैं, उनमें राष्ट्रवाद, देश के प्रति समर्पण, संस्कृति के उन्नयन के लिए दर्शन का भाव होता है। पश्चिमी सभ्यता की चकाचौंध से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने गुरुकुल की स्थापना, छात्राओं को संस्कृति और संस्कृत शिक्षा के बारे में बताया।