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Bareilly News: जान पर भारी न पड़े सरकारी व्यवस्था... निजी अस्पताल पहुंचे झुलसे लोग

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- जिला अस्पताल में न प्लास्टिक सर्जन न आईसीयू, ज्यादातर मरीज होते हैं रेफर
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बरेली। जिला अस्पताल के बर्न यूनिट में विशेषज्ञ चिकित्सक और जरूरी जीवन रक्षक संसाधन के अभाव की वजह से मरीज अब यहां आना नहीं चाहते। इसकी बानगी दिवाली के पर्व पर भी देखने को मिली। दिवाली पर आतिशबाजी से झुलसा एक भी व्यक्ति इलाज के लिए बर्न यूनिट नहीं पहुंचा, जबकि इसी दौरान शहर में संचालित निजी अस्पताल में 40 लोग पहुंचे। जिसमें से दो मरीजाें की हालत बेहद गंभीर थी। उनकी सर्जरी करनी पड़ी।
जिला अस्पताल बर्न यूनिट संचालित हुए करीब दस वर्ष बीत चुके हैं लेकिन यहां अब तक प्लास्टिक सर्जन की तैनाती नहीं हुई। जनरल सर्जन ही जले, झुलसे मरीजों को देख रहे हैं। बीते तीन माह के आंकड़ों पर गौर करें तो इलाज के लिए पहुंचे 34 मरीजों में नौ हायर सेंटर रेफर हुए।
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यहां एक ड्रेसर और दो सहायक भर्ती मरीजों की मरहम पट्टी करते हैं। रोस्टर के तहत तीन स्टाफ नर्स तैनात हैं। यूनिट में दवाएं भरपूर हैं। सर्जरी की जरूरत पर जनरल सर्जन मरीजों को देखते हैं। दावा है कि करीब 40 फीसदी तक झुलसे मरीजों का इलाज होता है। इससे ज्यादा झुलसे मरीजों को लखनऊ या अलीगढ़ हायर सेंटर रेफर किया जाता है।

प्लास्टिक सर्जन के लिए भेजा जा रहा पत्र
एडीएसआईसी डॉ. अलका शर्मा के मुताबिक अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए नियमित अंतराल पर मुख्यालय को पत्र भेजा जा रहा है। फिलहाल सीनियर सर्जन डॉ. एमपी सिंह को नोडल अधिकारी बनाया है। दिवाली को देखते हुए अतिरिक्त स्टाफ तैनात है।

अनार, चकरी जलाने के दौरान सर्वाधिक लोग झुलसे
निजी अस्पताल के वरिष्ठ प्लास्टिक सर्जन डॉ. कौशल कुमार के मुताबिक इलाज के लिए पहुंचे लोगों में ज्यादातर अनार जलाने के दौरान चपेट में आए। चकरी और मेहताब ने भी लोगों को झुलसाया।
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बर्न यूनिट में भर्ती, रेफर मरीज
माह भर्ती रेफर
जुलाई 14 05
अगस्त 09 02
सितंबर 11 02
अक्तूबर 12 03

वर्जन
बर्न यूनिट में प्लास्टिक सर्जन और जिला अस्पताल में आईसीयू की सुविधा न होने से गंभीर मरीजों को रेफर किया जाता है। शासन से प्लास्टिक सर्जन की मांग हो रही है। अब तक कोई सकारात्मक जबाव नहीं मिला। - डॉ. विश्राम सिंह, सीएमओ
अमर उजाला ब्यूरो
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