बच्चों को अभी भी नई किताब मिलने का इंतजार, अफसरों को सता रही प्रकाशक के भुगतान की चिंता
बरेली। बेसिक शिक्षा विभाग में यूनिफार्म और स्वेटर वितरण के बाद अब किताबों के वितरण में बड़े फर्जीवाड़ा का मामला प्रकाश में आया है। परिषदीय स्कूलों में नया सत्र शुरू हुए करीब नौ माह गुजर चुके हैं लेकिन बच्चे नई के बजाय फटी पुरानी किताबों से ही पढ़ाई कर रहे हैं। करोड़ो रुपयों का खर्च दिखाने के बाद भी स्कूलों तक पुस्तकें तो नहीं पहुंची लेकिन अफसर पुस्तकें सप्लाई करने वाली फर्म के भुगतान की फाइल लेकर सीडीओ के पास पहुंच गए। पुस्तकों की गुणवत्ता, सत्यापन आदि पर सवाल पर अफसर बगलें झांकने लगे। रिपोर्ट तलब की तो फर्जीवाड़ा खुलने की आशंका से विभाग में खलबली मची है।
साल 2019 के शिक्षा सत्र में स्कूलों में पंजीकृत करीब सवा तीन लाख बच्चों के लिए शासन स्तर से टेंडर हुआ लेकिन भुगतान किताबों के शत प्रतिशत वितरण, गुणवत्ता आदि की जांच के बाद प्रशासन स्तर से किया जाने के शासनादेश हैं। गुरुवार की दोपहर बेसिक शिक्षा विभाग के पाठ्य पुस्तक वितरण का कार्यभार संभाल रहे डीसी राजीव शर्मा पुस्तक सप्लाई करने वाली फ र्म के बकाया 25 फीसदी भुगतान की फाइल सीडीओ के पास लेकर पहुंचे थे। सीडीओ ने अवशेष पुस्तकों की ब्लॉकवार रिपोर्ट मांगी तो डीसी ने रिपोर्ट न होने की बात कही। फिर, मानकों के अनुसार किताबों की सत्यापन किए जाने के सवाल पर भी डीसी खामोश रहे। इसके बाद पुस्तकों के शत प्रतिशत वितरण के सवाल पर उन्होंने हामी भर दी। इस पर सीडीओ ने पूर्व में हुए निरीक्षण में कई स्कूलों में बच्चों को पुरानी किताबें पढ़ते देखने की बात कही तो वह बगलें झांकने लगे। सत्यापन और गुणवत्ता रिपोर्ट संलग्न न करने पर भी जमकर फटकार लगाई। साथ ही, सभी ब्लॉकों से रिपोर्ट तलब की। इस पर डीसी फाइल उठाकर कार्यालय से बाहर चले गए।
काफी बची किताबें लेकिन दर्शाई कम
रिपोर्ट के मुताबिक जिले के स्कूलों को वितरित हो चुकी करीब 23 लाख पुस्तकों का भुगतान बाकी है। मामले पर सीडीओ ने पूर्व में बची हुई किताबों का रिकॉर्ड मांगा तो डीसी ने 3700 किताबें बची होने की बात कही। लेकिन 23 लाख की रिपोर्ट में यह संख्या नहीं घटाई। सीडीओ ने जिले में सिर्फ सैंतीस सौ किताबें बचने पर सवाल किया तो डीसी ने यही रिपोर्ट मिलने का दावा किया। फिर फटी और घटिया प्रिंटिंग मिली किताबों की रिपोर्ट मांगी तो वह भी उनके पास नहीं थी। सीडीओ ने मामले में किताबों का वितरण कम लेकिन सप्लाई अधिक दिखाने की बात कही तो डीसी चुप्पी साधे रहे।
प्रमुख सचिव और जेडी ने भी पकड़ा खेल
पिछले दिनों निरीक्षण पर आए प्रमुख सचिव नवनीत सहगल ने भी स्कूलों का निरीक्षण किया था तब भी बच्चे पुरानी किताबों से पढ़ाई करते मिले थे। मामले पर अफसरों ने सितंबर 2018 की छात्र संख्या के आधार पर किताबों की सप्लाई होने की जानकारी देते हुए जल्द ही नए सत्र में बढ़े बच्चों को किताब मिलने की जानकारी दी थी। इससे पहले संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. प्रदीप कुमार ने भी निरीक्षण के दौरान कई स्कूलों में बच्चों को पुरानी किताबें पढ़ते देखने पर नाराजगी जताई थी। वहीं, सीडीओ को भी पिछले दिनों स्कूलों के निरीक्षण में पुरानी किताबें से ही पढ़ाई करते बच्चे मिले थे।
बड़े स्तर पर हो रहा है किताबों का ‘खेल’
बताया जाता है कि स्कूलों में अभी भी करीब 30 फीसदी यानि करीब एक लाख बच्चे पुरानी किताबों से ही पढ़ाई कर रहे हैं लेकिन अफसर नई किताबों का वितरण दिखाकर करीब एक लाख किताबों का भी भुगतान कराने के फेर में हैं। कक्षा एक से आठ तक के लिए उर्दू और इंग्लिश मीडियम की किताबें तो अभी बांटी ही नहीं गईं हैं। लेकिन भुगतान होने के बाद किताबों के बजट का बंदरबाट शुरू होगा। इसमें शिक्षा विभाग के अफसरों की कार्यशैली पर सवालिया निशान लग रहा है।
वर्जन:
- सभी स्कूलों में किताबों की आपूर्ति शत प्रतिशत हो चुकी है, अगर बच्चे जबरन बडे़े भाई बहन की पुरानी किताबें ही लेकर पढ़ने आ रहे हैं तो इसमें हमारा कोई दोष नहीं हैं। एक-एक स्कूल से किताबों की रिपोर्ट तैयार करना बेहद मुश्किल है। सीडीओ के निर्देश पर ब्लॉक से किताबों की गुणवत्ता संबंधी रिपोर्ट मंगा ली है। - राजीव शर्मा, डीसी
- पिछले दिनों हुए निरीक्षण में कई बच्चे पुरानी किताब से पढ़ाई करते मिले थे। ऐसे में संभावना है कि अभी शत प्रतिशत पुस्तकों का वितरण स्कूलों में नहीं हो सका है। जब तक सभी बच्चों के पास नई किताब नहीं पहुंचेगी बकाया 25 फीसदी भुगतान नहीं किया जाएगा। भुगतान के लिए प्रॉपर रिपोर्ट अभी तैयार नहीं हुई है। - सत्येंद्र कुमार, सीडीओ