गोरखपुर निवासी एक व्यक्ति खुटार में काम के सिलसिले में आए थे। उनकी 15 वर्षीय बेटी खेत में आलू बीनने गई थी। वहीं पर पुवायां के एक गांव की 14 वर्ष की दूसरी किशोरी से उसकी मुलाकात हो गई। पुवायां की किशोरी ने आलू बेचकर मिले रुपये से खुटार की किशोरी को की-पैड वाला मोबाइल फोन खरीदकर दे दिया। इसके बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हो गई।
एक दिन पुवायां की किशोरी खुटार की अपनी दोस्त को लेकर चली गई। एक सितंबर को दोनों देहरादून पहुंच गए। 15 दिन बाद मंदिर में शादी कर खुटार की किशोरी पत्नी और पुवायां की किशोरी पति के रूप में किराये पर कमरा लेकर रहने लगी। इधर, खुटार की किशोरी के परिजन ने थाने में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने उसकी तलाश कर देहरादून से बरामद कर लिया।
उसे 22 नवंबर को बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया। मांग में सिंदूर, गले में मंगलसूत्र डालकर पहुंची किशोरी के बयान दर्ज किए गए तो उसने अपनी शादी की जानकारी दी तब राज खुला। किशोर बोर्ड के सदस्यों ने उसे समझाने की कोशिश की लेकिन किशोरी अपनी साथी के साथ रहने की जिद पर अड़ी रही। समिति के सदस्यों ने वंश आगे बढ़ाने को लेकर सवाल किया तो किशोरी का जवाब था कि वह कुछ न कुछ व्यवस्था कर लेगी, लेकिन दूसरी किशोरी का साथ नहीं छोड़ेगी। उसे परिजन के सुपुर्द कर दिया गया।
मामले में अज्ञात के खिलाफ परिजन ने मुकदमा दर्ज कराया था। बरामद किशोरी को परिजन साथ ले गए हैं। अग्रिम कार्रवाई के लिए विधिक राय मांगी गई है। -पंकज पंत, सीओ पुवायां