एसपी सिटी ने बताया कि काफी समय से आईएमए ब्लड बैंक के बाहर खून बेचने वाला गिरोह सक्रिय था। खून की जरूरत वाले मरीजों के तीमारदारों को डोनर नहीं मिलने पर आईएमए ब्लड बैंक के सफाई कर्मचारी अभय और विनीत उनको फुसला लेते थे। फिर अपने साथी आजमनगर के तड़ीखाना निवासी प्रेमनाथ और प्रेमनगर के इंद्रानगर निवासी धीरेंद्र शर्मा से संपर्क करा देते थे। इसके बाद जब सौदेबाजी तय हो जाती थी तो प्रेमनाथ और धीरेंद्र नशेड़ी, लाचार और गरीब लोगों को बुलाकर उनका खून निकलवा देते थे। खून देने वाले को बदले में खाने-पीने की चीजें और मामूली रकम देते थे। बाकी जो रुपये बचते थे उसको चारों आपस में बांट लेते थे। पता चला है कि तीमारदार की हैसियत के हिसाब से यह लोग आठ से 10 हजार रुपये तक में खून बेच देते थे।
एसपी सिटी ने बताया कि आईएमए प्रबंधन की ओर से भी इस तरह की गोपनीय सूचना दी गई थी। इसमें कोतवाली पुलिस ने मुखबिरों को लगाकर सोमवार तड़के दबिश दी। तब ब्लड बैंक के बाहर से चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। कैंट के लाल फाटक निवासी अभय और विनीत रैकेट चला रहे थे। आईएमए ब्लड बैंक में आने वाले नशेड़ियों के खून की जांच भी दोनों कर्मचारी प्रभावित करते थे। पुलिस इनके सिंडिकेट की जानकारी जुटा रही है। अन्य नाम सामने आने पर गिरफ्तारी की जाएगी।
मुंहमांगी कीमत पर तय होता था खून का सौदा
गंभीर मरीजों के तीमारदार किसी कीमत पर अपने मरीज के लिए डोनर ढूंढते हैं। ऐसे तीमारदारों को विनीत और अभय भांप जाते थे। दोनों लोग तीमारदार की मजबूरी का फायदा उठाकर प्रेमनाथ और धीरेंद्र के पास भेज देते थे। इसके बाद प्रेमनाथ और धीरेंद्र मुंहमांगी कीमत लेकर बीमार और लाचार डोनर उपलब्ध कराते थे। पिछले साल ब्लड बैंक में दिहाड़ी मजदूरों के खून की सौदेबाजी करने वाला युवक पकड़ा गया था। उसने बताया था कि खून के बदले मजदूरों को दो हजार रुपये दिए जाते थे।
नहीं चला ठेले और कोरियर का काम तो करने लगे खून का धंधा
एसपी सिटी ने बताया कि हाईस्कूल फेल प्रेमनाथ आईएमए के बाहरी हिस्से में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन दफ्तर के सामने जूस का ठेला लगाता है। प्रेमनाथ की पहचान ब्लड बैंक कर्मचारी अभय और विनीत से हो गई। दोनों ने खून के धंधे में होने वाले फायदे के बारे में बताया तो प्रेमनाथ गरीब, लाचार लोगों का खून निकलवाने लगा। वहीं, धीरेंद्र शर्मा बीए पास है, वह कोरियर का काम करता था। उसकी भी नजदीकी विनीत और अभय से हो गई। उसे भी अभय और विनीत ने खून बेचकर मुनाफा कमाने के बारे में बताया। धीरेंद्र भी गरीब, नशेड़ियों को लाकर उनका खून निकलवाता था और महंगे दामों पर सौदा तय करता था।
आरोपियों के नेटवर्क का पता करेगी पुलिस: एसपी सिटी
चारों आरोपियों के मोबाइल की पुलिस जांच कर रही है। इन्होंने कितने लोगों का खून निकलवाया, यह खून किन मरीजों के तीमारदारों ने लिया। इन आरोपियों के नेटवर्क में और कितने लोग हैं, जैसे सवालों का कोतवाली पुलिस विवेचना में जवाब तलाश करेगी। अन्य लोगों के नाम जुड़ेंगे तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। -मानुष पारीक, एसपी सिटी