एनसीआरपी से पकड़ में आया गिरोह
प्रेमनगर पुलिस की गिरफ्त में आए गिरोह के तार कई राज्यों से जुड़े हैं। थाना प्रभारी आशुतोष रघुवंशी ने बताया कि गिरोह के लोग तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा, आंध्रप्रदेश, उत्तराखंड और यूपी के ठगों से जुड़े थे। इन राज्यों से नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर काफी शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। इन शिकायतों की जांच की गई तो ठगी करने में मोबाइल नंबर और खाते बरेली के निकले। तभी से साइबर क्राइम थाना पुलिस गिरोह के सदस्यों पर कार्रवाई की तैयारी में थी। अब गिरोह के बाकी सदस्यों को पकड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
खाता खुलवाकर कमीशन पर उठा रहा है गिरोह
सूत्रों के मुताबिक जिले में ऐसे गिरोह सक्रिय हैं जो आम और कम पढ़े लिखे लोगों के खाते खुलवाकर ठगों को उपलब्ध कराते हैं। इन खातों में आने वाली रकम पर गिरोह के लोग मोटा कमीशन लेते हैं और खाताधारक को मामूली रुपये देते हैं। शहर के आसपास कई गांवों में इस तरह का खेल किया जा रहा है। कई लोग बोगस कंपनी और फर्म बनाकर उनके चालू खातों का इस्तेमाल बड़ी धनराशि को ट्रांसफर करने में करते हैं। आईवीआरआई के रिटायर्ड प्रोफेसर से ठगी गई रकम भी लखनऊ की एक बंद कंपनी के नाम से खुले इसी तरह के चालू खाते में भेजी गई।
परतापुर चौधरी के लोगों का टेरर फंडिंग से जुड़ चुका नाम
गिरोह में शामिल इज्जतनगर के परतापुर चौधरी का रहने वाला मुशर्रफ गिरोह का सरगना बताया जा रहा है। इंस्पेक्टर के मुताबिक मुशर्रफ उत्तराखंड की फैक्टरी में काम करने गया था। वहां वह साइबर ठगों और हवाला कारोबारियों के संपर्क में आया। सेटिंग होने के बाद जिले में अपना गैंग बनाकर बड़े पैमाने पर लोगों के खाते खुलवाए और ठगों को उपलब्ध कराए।
परतापुर चौधरी गांव के कई लोग कुछ साल पहले टेरर फंडिंग में जेल भेजे गए थे। तब एटीएस और लखीमपुर पुलिस ने कार्रवाई की थी। अब फिर टेरर फंडिंग की चर्चा होने लगी है। मुशर्रफ के उत्तराखंड नेटवर्क की भी जांच की जा रही है। दरअसल, उत्तराखंड की कंपनियों में काम करने वाले मजदूरों के खातों का इस्तेमाल भी अवैध लेनदेन में करने के साक्ष्य मिले हैं।
एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि प्रेमनगर थाना क्षेत्र में पकड़े गए गिरोह की गतिविधियों की जांच की जा रही है। बाकी आरोपियों व संभावित अन्य लोगों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए टीम दबिश दे रही है। साइबर थाने व सर्विलांस सेल की मदद भी ली जा रही है।