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‘गांधीजी का पूरा जीवन एवं दर्शन आध्यात्मिक’

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आयोजन को संबोधित करते वक्ता। - फोटो : अमर उजाला, बरेली
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बरेली। गांधीजी का पूरा जीवन और दर्शन आध्यात्मिक था। उन्होंने देश और समाज की नब्ज पकड़ी, समता-अहिंसा की वकालत की। यही उनकी विचारधारा थी। गांधी जी की 150वीं जयंती वर्ष पर साहू राम स्वरूप महिला महाविद्यालय के गांधी अध्ययन केंद्र के तत्वावधान में ‘21वीं सदी की चुनौतियां: गांधी दर्शन के परिप्रेक्ष्य में’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला में वक्ताओं ने ये विचार व्यक्त किए।
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कार्यशाला का शुभारंभ क्षेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारी राजेश प्रकाश ने गांधीजी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया गया। कार्यक्रम में पूर्व प्राचार्य गन्ना उत्पादक पीजी कॉलेज बहेड़ी डॉ. नागेश्वर प्रसाद ने कहा कि गांधीजी ने वर्तमान सामाजिक सभ्यताओं पर जो सवाल खड़े किए वह आज भी प्रासंगिक हैं। एमएच कॉलेज मुरादाबाद के प्राचार्य डॉ. राकेश सक्सेना ने कहा कि गांधी जी ने सर्व धर्म समभाव की बात कही। एमबी कॉलेज हल्द्वानी के प्रोफेसर प्रो. कैलाश चंद्र ने कहा कि आज हर आदमी पूंजीवाद, उपभोक्तावाद और बाजारवाद मेें बंट गया है। इसलिए आज गांधीजी के दर्शन को जीने की आवश्यकता है।
प्रो. अतुल सिन्हा ने कहा कि गांधी जी का आग्रह धर्म निरपेक्षता का था। गांधी जी खुद को सनातनी कहते थे। समापन सत्र में विषय विशेषज्ञ के रूप में पूर्व प्राचार्य बरेली कॉलेज व निदेशक गंगाशील महाविद्यालय नवाबगंज डॉ. एनएल शर्मा , डॉ. वंदना शर्मा, एसो. प्रोफेसर सुबोध धवन, डॉ. एससी त्रिपाठी आदि ने गांधी के जीवन और उनके दर्शन को आध्यात्मिक बताया। कार्यशाला में उपस्थित 140 छात्राओं को प्रमाणपत्र वितरित किए गए। प्रथम सत्र का संचालन अर्थशास्त्र विभाग की एसो. प्रोफेसर डॉ. पूनम सिंह और द्वितीय सत्र का संचालन डॉ. प्रीती पाठक व श्रीमती सुधा गुप्ता ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. राकेश अरोरा ने की। इस दौरान प्रबंध समिति के सदस्य आर एन मेहरा, आईएन गोयल, एसवी राठी एवं महाविद्यालय की शिक्षिकाएं डॉ. शशि शुक्ला, डॉ. अनामिका कौशिक, डॉ. राधा यादव, डॉ. ज्योति शर्मा, डॉ. प्रीति सिंह, डॉ. अलका शर्मा, रेखा पांडेय आदि उपस्थित रहीं।
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