बरेली। अहिंसा के रास्ते पर चल कर देश को आजाद कराने वाले महात्मा गांधी मोहन दास करम चंद गांधी का तीन बार बरेली आगमन हुआ था। उन्होंने यहां टाउन हाल के एतिहासिक मोती पार्क में सभा भी की थी। इसमें उन्होंने देश की आजादी के लिए अंग्रेजों से लड़ रहे क्रांतिकारियों में जोश भर दिया था।
अब से लगभग नौ दशक पहले का कोई स्वतंत्रता सेनानी जीवित नहीं है जो उस वक्त यादों को ताजा कर सके। इस लिए उस वक्त की मौजूदा स्थिति का तो बहुत पता नहीं चल सका, अलबत्ता समाज सेवी जेसी पालीवाल और पूर्व एमएलसी रमेश विकट ने जरूर कुछ जानकारियां दीं। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि वह बहुत छोटे थे लेकिन कुछ कुछ बातें याद हैं। इन दोनों लोगों के मुताबिक महात्मा गांधी पहली बार 1931 में आए थे। उसके बाद 1935 में आना हुआ और तीसरी बार 1942 या 43 में आए।
इस संबंध में जेसी पालीवाल ने बताया कि महात्मा गांधी यहां प्रसाद कोठी में स्वतंत्रता सेनानी द्वारिका प्रसाद के यहां आया करते थे। उनका कयाम वहीं हुआ करता था। यानी जसवंत प्रसाद के दादा के यहां। यहीं पर स्वतंत्रता सेनानियों के साथ बैठक की थी। इसमें उस वक्त स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई लड़ रहे सेठ दामोदर स्वरूप, पंडित दीना नाथ मिश्रा, दरबारी लाल शर्मा, राम मूर्ति (पूर्व मंत्री), मुहम्मद हसन (पूर्व एमएलसी) बदायूं के नवल किशोर (पूर्व विधायक) आदि शामिल हुए थे।