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निगम बोर्ड बैठक में हंगामा

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नगर निगम की बोर्ड बैठक में भीख मांगते पार्षद।
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बरेली। शनिवार को आईएमए हाल में नगर निगम बोर्ड की बैठक के दौरान उस वक्त हंगामा हो गया जब भाजपा पार्षद विपुल लाला लुंगी, बनियान पहन हाथ में कटोरा लेकर भीख मांगने सदन में पहुंच गए। मेयर ने कहा कि विरोध प्रदर्शन का यह गलत ठीक नहीं है। मेयर ने उन्हें तीन बैठकों के लिए सदन से निलंबित कर दिया और पुलिस से उन्हें बाहर निकालने को कहा। पुलिस उन्हें पकड़ने के लिए आगे बढ़ी तो साथी पार्षद भड़क गए और हंगामा करने लगे। इस दौरान पुलिस और पार्षदों के बीच धक्कामुक्की और हाथापाई भी हुई। पार्षदों ने पुलिस पर पीटने का आरोप लगाया।
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पूर्वान्ह 11 बजे आईएमए हाल में नगर निगम बोर्ड की बैठक शुरू हुई थी। सदन में जब प्रश्नकाल चल रहा था, तभी भाजपा पार्षद विपुल लाला लुंगी, बनियान पहने हाथ में कटोरा लेकर सदन में पहुंचे। उनके गले में एक तख्ती भी लटक रही थी। उस पर लिखा था- करदाताओं का प्रतिनिधि भिक्षा मांगे या अधिकार तय करो। वह सदन में मेयर और निगम अधिकारियों के सामने खड़े हो गए और कटोरा आगे बढ़ा दिया। इस पर मेयर ने उन्हें सदन से बाहर जाने को कहा, लेकिन वह अपनी जगह से नहीं हिले।
इस पर मेयर ने पार्षद विपुल को तीन बैठकों के लिए सदन से निलंबित करने के निगम अधिकारियों को निर्देश दिए और उन्हें सदन से बाहर निकालने के लिए पुलिस बुला ली। पुलिस विपुल लाला को पकड़ने के लिए आगे बढ़ी तो सदन में पहली पंक्ति में बैठे भाजपा पार्षद मुकेश मेहरोत्रा, शालिनी जौहरी, अमित, कपिल कांत, सपा पार्षद अब्दुल कयूम मुन्ना, पूर्व उपसभापति अतुल कपूर, सपा पार्षद शमीम अहमद और गौरव सक्सेना आदि ने विरोध करना शुरू कर दिया। इस बीच पार्षदों और पुलिस में जमकर धक्कामुक्की हुई। भाजपा पार्षद मुकेश मेहरोत्रा का आरोप है कि मेयर के अंगरक्षक ने उन्हें थप्पड़ मारा। इससे उनके कान में चोट आई है। कुछ और पार्षदों ने भी अंगरक्षक और पुलिस पर हाथापाई करने का आरोप लगाया। इसके बाद सभी पार्षद सदन से निकल गए और बाहर धरने पर बैठ गए। मेयर ने कुछ पार्षदों को समझाकर धरने से उठाया। करीब तीस मिनट बाद सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हो सकी।
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पूर्व मेयर आईएस तोमर ने कहा- बेहद शर्मनाक घटना
पार्षद पुलिस कार्रवाई का विरोध करते हुए धरने पर बैठकर नारेबाजी करने लगे। इसी दौरान पूर्व मेयर डॉ. आईएस तोमर वहां पहुंच गए। उन्होंने कहा कि उनके 10 साल के कार्यकाल में ऐसी शर्मनाक घटना कभी नहीं हुई। अधिकारियों ने पुलिस जरूर बुलाई लेकिन सदन के बाहर ही तैनात रही। सदन में पुलिस कभी नहीं आई। शनिवार को बोर्ड की बैठक में जो घटना हुई है, उसकी जितनी निंदा की जाए, कम है। भाजपा हमेशा लोकतंत्र की हत्या करती आई है और शनिवार को भी यही हुआ। सदन के सदस्यों के साथ जो हुआ वह बेहद शर्मनाक और निंदनीय है।
प्राइवेट कंपनी की तरह निगम चलाना चाहते हैं मेयर
भाजपा पार्षद विपुल लाला ने कहा कि वह सदन में सवाल पूछते हैं तो मेयर जवाब नहीं देते हैं। निगम अधिकारियों से सवाल पूछो तो उन्हें भी मेयर बोलने नहीं देते हैं। मेयर के साथ उनका हाईकोर्ट में मुकदमा चल रहा है। इसी बात से मेयर उनसे व्यक्तिगत खुन्नस मानते हैं। मेयर नगर निगम को प्राइवेट कंपनी की तरह चलाना चाहते हैं, इसीलिए सदन की कार्यवाही से मीडिया को दूर रखा जाता है, ताकि मेयर घालमेल करते रहें और जनता को कुछ पता ही न चले। वह आगे भी इसका विरोध करेंगे उनके सांविधानिक अधिकारों का कोई हनन नहीं कर सकता है।
दल नहीं, पार्षद साथी का समर्थन
सपा पार्षद गौरव सक्सेना ने कहा कि सदन में शनिवार को लोकतंत्र की हत्या की गई। यह नहीं होना चाहिए था। दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सपा पार्षदों ने सदन में अपने साथी का समर्थन किया और विरोध में उनके साथ धरने पर बैठे। सदन की गरिमा का ख्याल रखा जाना चाहिए था। गरिमा भंग हुई तो हम सभी ने मिलकर विरोध किया।
सदन में प्रश्नकाल शांति से चल रहा था। सभी सदस्यों को बोलने का मौका दिया जा रहा था। इसी बीच अचानक पार्षद विपुल लाला अर्धनग्न होकर पहुंच गए। सदन में महिला सदस्य भी मौजूद थीं। पहले तो उन्हें इस तरह की हरकत न करने के लिए कहा गया, लेकिन बार-बार कहने के बाद भी वह नहीं माने तो शोरशराबा सुनकर पुलिस आ गई। विपुल लाला ने सदन का अपमान किया है। - उमेश गौतम, मेयर
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