सत्यापन के दौरान ग्रामीणों की शिकायत पर संज्ञान में आया मामला, जांच शुरू
बरेली। स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण में अफसरों ने जमकर खेल किया। कहीं तो एक भी शौचालय नहीं बनाया तो कहीं लक्ष्य से ज्यादा बनवा दिए, जबकि बजट सिर्फ लक्ष्य के मुताबिक ही जारी किया गया था। ऐसे में साफ है कि या तो पहले बने शौचालयों को दिखाकर रकम हड़प ली गई या फिर निर्माण की गुणवत्ता में खेल किया गया। फिलहाल मामले की जांच कराई जा रही है।
पिछले दिनों जिले को ओडीएफ घोषित का दावा करते हुए केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेज भी गई। केंद्र सरकार की टीम के निरीक्षण से पहले सत्यापन का दौर शुरू हुआ तो नित नए प्रकरण सामने आ रहे हैं, जो शौचालय निर्माण में बड़े स्तर के घोटाले के संकेत दे रहे हैं। जिले की दो ग्राम पंचायतों में साल 2011 के बेसलाइन सर्वे समेत क्रमवार कई वर्गों में हुए निर्माण में लक्ष्य से ज्यादा शौचालय बना दिए गए हैं। जबकि बजट लक्ष्य के सापेक्ष ही जारी हुआ था। सीडीओ ने मामले की जांच शुरू करा दी है। बताया जाता है कि शौचालय निर्माण के शुरु आती दौर में अफसरों ने बजट को व्यवस्थित तरीके से खर्च करने के बजाय बड़े पैमाने पर खपाया। बताया कि कई ग्राम पंचायतों में प्रधानों और सचिवों ने लक्ष्य के आधार पर शौचालय निर्माण दिखाने के लिए रकम ठिकाने लगाई। इसमें पात्रता की शर्त पूरी करने वाले ग्रामीणों के पूर्व में बने शौचालयों का भी निर्माण दिखाकर रकम हड़प ली गई। कारगुजारी छिपाने के लिए प्रधान और सचिव ने शौचालयों की जियो टैगिंग नहीं कराई। ताकि जांच मेें मामला पकड़ में न आए। अब सत्यापन में ग्रामीणों ने शिकायत दर्ज कराई तो लक्ष्य से ज्यादा शौचालय बनने का मामला प्रकाश में आया है। मामले पर जांच के निर्देश दिए हैं।
कहां कितने बने शौचालय
आंवला की ग्राम पंचायत बिहात में 290 का लक्ष्य मिला था लेकिन शौचालय 296 बने। सरदार नगर में 447 शौचालयों का लक्ष्य था लेकिन मौके पर 485 मिले। वहीं बनारी में 420 का रुपया जारी हुआ लेकिन मौके पर शौचालय 414 ही मिले हैं। सभी प्रकरणों की जांच शुरू करा दी गई है।
‘कई वर्गों में शौचालय का निर्माण कराया गया है, संभव है कि इसी बीच कभी शौचालय बनाए गए हों और उन्हें दर्ज करने में खामी हो गई हो। मामले की जांच हो रही है, रिपोर्ट आने के बाद स्थिति का पता चलेगा।’
- सत्येंद्र कुमार, सीडीओ