बरेली। सवा सौ करोड़ के घोटाले और सीबीआई जांच में घिरे सतीश कुमार को बरेली के अफसरों ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में मिशन मैनेजर के पद पर नियुक्ति देकर 22 सौ करोड़ के बजट से ‘योजनाएं’ बनाने की जिम्मेदारी भी सौंपी थी मगर रविवार को ग्रेटर नोएडा में सतीश कुमार की गिरफ्तारी के साथ ही सारा खेल खराब हो गया। सवाल उठने शुरू हुए तो ये परतें भी उधड़नी शुरू हो गईं कि इस घोटालेबाज अधिकारी की स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में नियुक्ति बगैर किसी विज्ञापन के सीधे कर ली गई थी। उसे यहां सारे नियम-कायदे ताक पर रखकर सर्किट हाउस में एक सुइट के साथ सरकारी बंगला भी एलॉट कर दिया गया था।
ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी यीडा में 126 करोड़ के घोटाले में जून 2018 में पुलिस केस दर्ज किया था जिसके आरोपियों में यीडा के एसीईओ रहे पीसीएस अफसर सतीश कुमार का भी नाम था। जून में ही घोटाले के मुख्य आरोपी यीडा के तत्कालीन सीईओ आईएएस पीसी गुप्ता की गिरफ्तारी भी हो चुकी थी, फिर भी कुछ महीने पहले सतीश कुमार को बरेली स्मार्ट सिटी प्राइवेट लिमिटेड में बतौर मिशन मैनेजर नियुक्ति कर दी गई। सूत्रों के मुताबिक सतीश कुमार को यह नियुक्ति देने के बाद उसे जनसंपर्क के साथ विभिन्न परियोजनाओं की डीपीआर बनाने और टेंडर जैसे बजट से जुड़े महत्वपूर्ण कामों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। करीब दो महीनों से सतीश कुमार बरेली में ही रहकर स्मार्ट सिटी का ताना-बाना बुनने में लगा हुआ था, लेकिन रविवार को ग्रेटर नोएडा में उसकी न
चयन प्रक्रिया न जांच पड़ताल सीधे-सीधे थमाया नियुक्ति पत्र
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में मिशन मैनेजर पद पर नियुक्ति के लिए कोई विज्ञापन तक जारी नहीं किया गया था, यह बात अब नगर आयुक्त और स्मार्ट सिटी के सीईओ सैमुअल पॉल एन भी स्वीकार कर रहे हैं। यही नहीं 22 सौ करोड़ के बजट की परियोजना सतीश कुमार के हाथों में सौंपने से पहले उनकी बैकग्राउंड की भी कोई जांच नहीं की गई। अब जरूर नगर आयुक्त का कहना है कि सतीश कुमार ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में नियुक्ति के दौरान यह तथ्य छिपा लिया था कि वह यीडा में हुए 126 करोड़ के घोटाले में आरोपी हैं लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि आखिर क्यों उनके दावे पर आंखें मूंदकर यकीन कर लिया गया। सूत्रों का यहां तक दावा है कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में मिशन मैनेजर का कोई पद ही नहीं है, फिर भी सतीश कुमार को इस प्रोजेक्ट से जोड़ने के लिए यह नया पद बना दिया गया।
गिरफ्तारी से बचते फिर रहे सतीश को सिटी मजिस्ट्रेट की अनुमति बगैर सर्किट हाउस में मिला सुइट
सवा सौ करोड़ के घोटाले में घिरे रिटायर्ड पीसीएस अफसर सतीश कुमार कहने को तो बरेली स्मार्ट सिटी प्राइवेट लिमिटेड नाम की प्राइवेट एजेंसी से जुड़े थे लेकिन उन्होंने यहां नियुक्ति होते ही जिला प्रशासन के अफसरों पर भी अच्छी-खासी धमक बना डाली। बताया जाता है कि तीन महीने पहले उन्होंने यहां आते ही सिटी मजिस्ट्रेट मदन कुमार के समक्ष सर्किट हाउस में एक सुइट के लिए आवेदन किया था। सिटी मजिस्ट्रेट ने सतीश कुमार इसके लिए पात्र न मानते हुए उसका आवेदन खारिज कर दिया था लेकिन इसके बावजूद सतीश ने सर्किट हाउस में एनेक्सी कक्ष नंबर 4 हथिया लिया। तभी से वह इस कक्ष पर काबिज था, अब तक इस कक्ष का कोई किराया भी नहीं दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक सतीश कुमार के खानपान का खर्च भी सरकारी तौर पर वहन किया जा रहा था। अब सवाल उठ रहा है कि सिटी मजिस्ट्रेट के एकमात्र प्राधिकारी होने के बावजूद सतीश कुमार को सर्किट हाउस में सुइट किसकी अनुमति से मिला। बताया जाता है कि एक तरफ ग्रेटर नोएडा में पुलिस सतीश कुमार को तलाशती घूम रही थी और वह यहां सर्किट हाउस में रहकर शहर को ‘स्मार्ट’ बनाने में जुटा हुआ था।
एडीएम कंपाउंड में बंगला भी हथियाया
मरम्मत पर फूंकी जा रही सरकारी रकम
सतीश कुमार बरेली के अफसरों का कितना चहेता था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सर्किट हाउस के सुइट के साथ उसे एडीएम कंपाउंड में बी- 10 नंबर का बंगला भी आवंटित कर दिया गया। यह बंगला किसके आदेश पर उसे आवंटित हुआ है, अब कोई इस बारे में भी बोलने को तैयार नहीं है। बताया जा रहा है कि कुछ समय पहले बंगला आवंटित किए जाने के बाद सतीश कुमार उसमें रहने नहीं गया था। कई दिनों से इस बंगले में सरकारी रकम फूंककर तोड़फोड़ और मरम्मत कर उसे नए सिरे से सजाने का काम किया जा रहा है। हैरत की बात यह है कि यह बंगला एलॉट कराने के लिए पहले से कई अफसरों ने आवेदन कर रखा था लेकिन उनके आवेदन को नजरअंदाज कर दिया गया।
सपा सरकार में भी बोलती थी सतीश कुमार की तूती
मूल रूप से शामली के रहने वाले सतीश कुमार यीडा में 18 अप्रैल 2013 से 13 जुलाई 2015 तक तैनात रहे। तब प्रदेश में सपा की सरकार थी। इसी दौरान भूमि अधिग्रहण घोटाला सामने आया। सतीश कुमार पर अपने चहेतों और रिश्तेदारों को प्रोजेक्ट के लिए चिह्नित लोकेशन पर सस्ती जमीनें खरीदवाकर ऊंचे दामों पर अधिग्रहीत करा देने का आरोप लगा था। इसकी जांच शुरू होने के बाद जून 2018 में ग्रेटर नोएडा पुलिस ने केस दर्ज किया। इसके बाद यह मामला सीबीआई के हाथों में चला गया और जांच धीमी पड़ गई। यीडा के लिए खरीदी गई जमीनों की पत्रावलियों में सतीश कुमार के हस्ताक्षर हैं। नोएडा की सुपरटेक जार सोसाइटी में रह रहे सतीश कुमार की रविवार दोपहर गिरफ्तारी होते ही बरेली में उस पर मेहरबान अफसरों में खलबली मच गई।
संतोष गंगवार ने उठाया था पांच इंच के गमले में
दस फुट लंबा पौधा लगाने की योजना पर सवाल
बरेली में स्मार्ट सिटी के लिए हाल ही में बनाई गई योजनाओं पर भी लगातार सवाल उठ रहे थे। हाल ही में अफसरों ने शहर में छह अलग-अलग स्थानों पर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत ढाई करोड़ की लागत से वर्टिकल गार्डन बनाने की योजना की घोषणा की थी, जिस पर केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने भी सवाल उठाते हुए अफसरों को पत्र लिखा था। दरअसल इस योजना में पांच इंच के गमलों में दस फुट लंबाई के पौधे लगाने का दावा किया गया था। इसके साथ वर्टिकल गार्डन के अलग-अलग टेंडर भी नहीं किए गए। संतोष गंगवार ने कमिश्नर और नगर आयुक्त को लिखे पत्र में इस पर आपत्ति की थी। यहां तक कहा था कि अलग-अलग टेंडर न करके सरकार का बेवजह नुकसान कराया जा रहा है। हालांकि इसके बावजूद इस योजना में कोई संशोधन नहीं किया गया।
घोटालेबाज अफसर को अब बर्खास्त करने की तैयारी
सतीश कुमार की गिरफ्तारी के बाद उसे स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में नियुक्ति देने वाले अफसरों पर सवाल उठ रहे हैं। अफसरों को इसलिए भी तगड़ा झटका लगा है क्योंकि स्मार्ट सिटी की योजनाओं पर पहले से सवाल उठ रहे थे। शहर के आम लोगों के साथ जनप्रतिनिधियों को भी इस पर सख्त आपत्ति है कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में सिर्फ उन इलाकों को शामिल किया गया है जो पहले से विकसित हैं। सवालों में घिरे अफसरों ने अब सतीश कुमार को मिशन मैनेजर से हटाने की तैयारी शुरू कर दी है।
नगर आयुक्त ने कहा- जांच में थे आरोप इसलिए किया नजरअंदाज
नगर आयुक्त और बरेली स्मार्ट सिटी प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ सैमुअल पॉल एन ने बताया कि उन्हें सतीश कुमार के विषय में कोई जानकारी नहीं थी। अपने चरित्र प्रमाणपत्र में उन्होंने यह तथ्य छिपा लिया था कि वह 126 करोड़ के घोटाले के आरोपी हैं। इतने महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किए जा रहे अफसर के बड़े घोटाले में घिरे होने से अनजान रहने के सवाल पर उन्होंने कहा कि अक्सर कई आरोप अधिकारियों पर जांच की प्रक्रिया में होते हैं, इसलिए हम इसे नजरंदाज कर देते हैं। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी में एक अनुच्छेद है जिसके तहत रिटायर्ड आईएएस और पीसीएस अफसरों को बिना विज्ञापन निकाले सीधे रखा जा सकता है। सतीश कुमार के पास अर्बन डेवलपमेंट का पुराना अनुभव था, इसी को ध्यान में रखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई थी। उनकी गिरफ्तारी के बाद अब उन्हें जल्द बर्खास्त कर दिया जाएगा।