बरेली। बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में मासूम बच्चों का ‘हक’ लूट लिए जाने पुष्टि आखिरकार हो ही गई। प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा के निर्देश पर जांच कराई गई तो साफ हो गया कि जिले भर के स्कूलों में करीब दो करोड़ रुपये के खेल के सामान की खरीद गैररजिस्टर्ड सप्लायर्स से फर्जी बिलों पर की गई थी। ये बिल भी खेल के सामान के बजाय किताबों के हैं और इन पर जीएसटी नंबर तक नहीं है। कई स्कूलों में बगैर बिल के ही सामान खरीदने का पता गया। सीडीओ ने बीएसए और एबीएसए को कारण बताओ नोटिस देने के साथ प्रभारी मंत्री और डीएम को इस गोलमाल की रिपोर्ट भेज दी है।
बेसिक स्कूलों को खेल का सामान खरीदने के लिए शासन हर साल बजट जारी करता है। प्राइमरी स्कूल को पांच और जूनियर हाईस्कूलों को दस हजार रुपये दिए जाते हैं। इस तरह जिले के 2184 प्राइमरी स्कूलों के लिए एक करोड़ नौ लाख और जूनियर हाईस्कूलों के लिए 79.9 लाख रुपये का बजट दिया गया था। 26 सितंबर को प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा की समीक्षा बैठक में विधायकों ने शिकायत की थी कि ज्यादातर स्कूलों में खेल के सामान के बजट में भारी गोलमाल किया गया है। प्रभारी मंत्री ने सीडीओ को इसकी जांच का आदेश दिया था।
सीडीओ सत्येंद्र कुमार ने 144 न्याय पंचायतों के 275 स्कूलों की जांच कराई तो पता चला कि ज्यादातर स्कूलों में यह खरीद फर्जी बिलों पर की गई है। इन पर जीएसटी नंबर तक नहीं ही था। यही नहीं खरीद भी बगैर रजिस्ट्रेशन वाले सप्लायर्स से अधिकतम खुदरा मूल्य यानी एमआरपी पर की गई थी। यह भी पता चला कि तमाम स्कूलों में किताबों के बिल पर खेल के सामान की खरीद दिखाई है। इनकी बिलिंग भी कंप्यूटर के बजाय हाथ से की गई थी। ज्यादातर स्कूलों में तो पूरे बिल-बाउचर्स ही नहीं मिले। सीडीओ ने बताया कि इसके बाद भी ज्यादातर स्कूलों में खेल का सामान बच्चों को नहीं दिया गया था। खेल का सामान देखा तो उसकी गुणवत्ता भी ठीक नहीं मिली। जांच रिपोर्ट डीएम के साथ प्रभारी मंत्री को भी भेज दी गई है।
अब रजिस्टर्ड फर्मों से ही होगी खरीद
शासन ने इस साल के लिए अक्तूबर में सरकारी स्कूलों में खेल के सामान खरीद के लिए 1.84 करोड़ का बजट जारी कर दिया है। पिछली बार हुई खरीद में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी मिलने के बाद सीडीओ ने बेसिक शिक्षा परिषद के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस बार खेल का सामान रजिस्टर्ड फार्मों से खरीदा जाए और उसका पूरा रिकार्ड भी रखा जाए।
स्कूल की दीवारें बनेंगी बहीखाता
सरकारी रकम के गोलमाल को रोकने के लिए शासन ने निर्देश दिए हैं कि वर्ष 2017-18 से लेकर इस वित्तीय साल तक का यह ब्योरा स्कूलों की दीवार पर लिखा जाए कि विद्यालय को किस काम के लिए कितनी रकम मिलती है और वह कितनी खर्च हो गई है। शिक्षा निदेशक बेसिक डॉ. सर्वेेंद्र विक्रम बहादुर सिंह ने आठ नवंबर को इसका आदेश भी जारी कर दिया है।
बेसिक के स्कूलों में खेल के सामान की खरीद में कई गंभीर गड़बड़ियां मिली है। ज्यादातर स्कूलों में बिल बाउचर्स थे ही नहीं तो कई जगहों पर पक्के बिल नहीं थे। इसकी रिपोर्ट डीएम और प्रभारी मंत्री को भेज दी है।’
- सत्येंद्र कुमार, सीडीओ
परिषद के स्कूलों में तो खेल के साथ भी ‘खेल’ हो गया। लाखों की खेल सामग्री किताबों के बिल पर कर ली गई। कहीं तो बिना बिल के ही खरीद हो गई। विधायकों की शिकायत पर जब प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा ने जांच कराई तो इस गोलमाल का खुलासा हुआ। सीडीओ की जांच में सामने आया है कि खरीद बगैर रजिस्ट्रेशन वाले दुकानदारों से हुई है। जीएसटी नंबर भी न होने से ये बिल फर्जी माने गए हैं। सीडीओ ने प्रभारी मंत्री और डीएम को रिपोर्ट भेजते हुए बीएसए और एबीएसए को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।