बरेली। केंद्र सरकार अपना रोजगार शुरू करने के लिए कौशल विकास योजनाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित कर रही है। इसके लिए स्वयंसेवी और सामाजिक संस्थाओं से सहयोग लिया जा रहा है। यूपी में उद्योग विभाग का उद्यमिता विकास संस्थान विभिन्न क्षेत्रों में ट्रेनिंग दिला रहा है। बरेली में छह दिवसीय प्रशिक्षण के लिए नौ सेंटर कार्यरत हैं। प्रशिक्षण देने वाली संस्थाओं का चयन लखनऊ स्तर से हुआ है, इसलिए वे फर्जी सेंटर चलाने में भी पीछे नहीं है। पिछले दिनों शिकायत मिली कि आर्य समाज गली में एक कमरे में ज्वेलरी और हलवाई ट्रेड की ट्रेनिंग हो रही है। शिकायत मिलते ही संयुक्त आयुक्त आरआर गोयल ने मौके पर जांच टीम रवाना की। टीम ने मौके पर देखा कि हलवाई की ट्रेनिंग कागजों पर चल रही थी। मौके पर लाभार्थी फर्श पर नीचे दरी बिछाए बैठे मिले। कुर्सी-पंखे गायब थे और हलवाई ट्रेनिंग संबंधी एक भी उपकरण भी मौके पर नहीं था। टीम ने सेंटर संचालक से पूछताछ की तो बहानेबाजी करने लगा। टीम ने इसकी जांच रिपोर्ट संयुक्त आयुक्त को सौंप दी। फर्जी सेंटर चलाने की पुष्टि होते ही इसका अनुबंधन निरस्त कर दिया और इसकी पुष्टि निदेशालय से करा ली।
एक बैच में 25 लाभार्थी, हर ट्रेनी पर एक हजार रुपये खर्चा
सरकार एक एक प्रशिक्षणार्थी पर एक हजार रुपये खर्च कर रही है। यानी छह दिवसीय ट्रेनिंग सेंटर पर डेढ़ लाख रुपये खर्चा। लाभार्थी को प्रतिदिन 250 रुपये और 750 रुपये प्रति लाभार्थी सेंटर संचालक को भुगतान होता है। लेकिन विभागीय मिलीभगत से ज्यादातर सेंटर कागजों पर ही ट्रेनिंग दे रहे हैं। इनका चयन मुख्यालय करता है इसलिए स्थानीय स्तर पर इनकी मानीटरिंग नहीं हो पाती है।
‘शहर में हलवाई ट्रेनिंग सेंटर जांच में फर्जी मिला। एक कमरे में दो ट्रेड कैसे चल सकते हैं? जांच में मानक के अनुरूप सेंटर चलता नहीं मिला, इसलिए सेंटर निरस्त कर दिया है। उद्यमिता विकास संस्थान कागजों पर संचालित ऐसे सेंटरों की मॉनिटरिंग बढ़ाएगा।’
- राजेंद्र सिंह, संयोजक, उद्यमिता विकास संस्थान, लखनऊ