धर्मेंद्र कश्यप ने भाजपा से दूरी बनाते समय पार्टी के भीतर उपेक्षा, कथित भीतरघात और पिछड़े समाज से जुड़े मुद्दों को लेकर नाराजगी जताई थी। अब उनकी अखिलेश यादव से मुलाकात ने इस सवाल को हवा दे दी है कि क्या वह अपनी अगली राजनीतिक पारी के लिए नए मंच की तलाश में हैं। हालांकि, अभी उनके सपा में शामिल होने की कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।
आंवला के समीकरणों पर रहेगी नजर
धर्मेंद्र कश्यप बरेली और आंवला क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। ऐसे में उनका भाजपा से अलग होना और इसके बाद सपा प्रमुख से मुलाकात करना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। यदि वह भविष्य में सपा के साथ आते हैं, तो इसका असर जिले में विपक्ष की रणनीति और आंवला क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है। फिलहाल मुलाकात ने संभावनाओं के दरवाजे खोले हैं, लेकिन धर्मेंद्र कश्यप का अगला कदम ही स्पष्ट करेगा कि यह संवाद किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की शुरुआत है या केवल शुरुआती संपर्क।