मानसून से पहले नालों सफाई के नाम पर फिर पांच करोड़ रुपये बहाने की तैयारी है। नगर निगम ने इसके लिए स्वास्थ्य व निर्माण विभाग को जिम्मेदारी सौंपी है। हर साल बरसात से पहले नाला सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी हल्की बरसात में ही शहर में जलभराव हो जाता है। दो दिन पहले हुई हल्की बारिश में ही जगह-जगह जलभराव से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा था।
बरसात से पहले शहर के 213 नालों की तलीझाड़ सफाई के लिए नगर निगम की ओर से पांच करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। पिछले वर्षों के अनुभव बताते हैं कि यह रकम खर्च हो जाती है, पर नालों की सिल्ट नहीं खत्म होती। बारिश होने पर शहर की सड़कों पर नाव चलने की नौबत आ जाती है।
सफाई में बाधक बनेगी रेलिंग
सेटेलाइट हादसे के बाद सुरक्षा के नाम पर हाल ही में खुले नालों के किनारे लगवाई गई रेलिंग अब सफाई कार्य में सबसे बड़ी बाधा बनकर उभर रही है। जेसीबी से सफाई के दौरान रेलिंग टूटने का खतरा है और अगर रेलिंग नहीं हटाई गई तो सफाईकर्मी गहराई तक उतरकर सिल्ट नहीं निकाल पाएंगे। इसके अलावा, दुकानदारों को स्लैब हटाने की चेतावनी देकर अपनी कमियां छिपाने की कोशिश की जा रही है। सिविल लाइंस, कुतुबखाना, पटेल चौक, किला, सिकलापुर, आलमगिरीगंज, सुभाषनगर, बदायूं रोड आदि जगहों पर नालों पर स्लैब डालकर कब्जे कर लिए गए हैं। इससे सफाई के दौरान परेशानी होती है।
बरेली कॉलेज के पास 15 दिन पहले एक गाय नाले में गिर गई थी। तब जेसीबी से नालों से स्लैब हटाए गए थे, लेकिन अब वहां फिर अतिक्रमण हो गया है। हर बार सिल्ट निकालकर सड़क किनारे ही छोड़ देने की वजह से भी शहरवासी त्रस्त रहते हैं। इस बार भी मॉनिटरिंग और वीडियोग्राफी के दावे किए जा रहे हैं। जून के पहले हफ्ते तक शत-प्रतिशत सफाई का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन इसका पूरा होना मुश्किल लग रहा है।