बरेली के विकास में अपना योगदान देने के बजाय पिछले एक दशक से कर की चोरी कर रहे करदाताओं के खिलाफ नगर निगम अब सख्त रुख अपनाने जा रहा है। हाउस, वाटर और सीवर टैक्स के मद में करीब 20 करोड़ रुपये की राशि दबाए बैठे 20 हजार डिफॉल्टरों पर निगम प्रशासन जल्द ही सीलिंग और कुर्की की कार्रवाई शुरू करने जा रहा है। निगम ने इस बार वित्तीय वर्ष की समाप्ति यानी मार्च का इंतजार न करते हुए वित्त वर्ष के शुरू से ही कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।
नगर निगम की ओर से तैयार की गई काली सूची में आवासीय संपत्तियों की संख्या सबसे अधिक है, लेकिन राजस्व के लिहाज से व्यवसायिक और मिश्रित भवन निगम के रडार पर प्रमुखता से हैं। आंकड़ों के मुताबिक इन बकायेदारों में चार हजार व्यावसायिक और सात हजार मिश्रित (कमर्शियल व रिहायशी) भवन शामिल हैं। इन संपत्तियों पर पिछले कई वर्षों से कर बकाया है, जिसे वसूलने के लिए निगम ने सख्त रुख अपनाया है।
आवासीय संपत्तियों की संख्या ज्यादा
मुख्य कर निर्धारण अधिकारी पीके द्विवेदी ने बताया कि इन करदाताओं को पिछले पांच वर्षों के दौरान निरंतर नोटिस भेजे गए और उन्हें अपना बकाया जमा करने के पर्याप्त अवसर दिए गए। बार-बार दी गई चेतावनी और नोटिसों की अनदेखी करने के बाद अब विभाग के पास सख्त कदम उठाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। हालांकि आवासीय संपत्तियों की संख्या ज्यादा है, लेकिन बकाया धनराशि का एक हिस्सा व्यावसायिक संपत्तियों से आना है।
निगम की इस सख्त रणनीति के पीछे मुख्य उद्देश्य न केवल लंबित राजस्व की वसूली करना है, बल्कि शहर के अन्य करदाताओं के बीच सख्त संदेश भी देना है। बताया कि बकायेदारों की रिपोर्ट तैयार हो चुकी है और अब बिना किसी देरी के बड़े बकायेदारों के खिलाफ मौके पर जाकर संपत्ति की सीलिंग और कुर्की की प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी। इस अभियान से निगम के खजाने में करोड़ों की वृद्धि होने की उम्मीद है।