तिहाड़ जेल में सीखी साइबर ठगी
शाकिब ने पुलिस को बताया कि पहले गिरोह की कमान तिहाड़ जेल में बंद साथियों के हाथ में थी। उनसे ही उसने साइबर ठगी का फंडा सीखा। इसके बाद डॉक्टर सचेंद्र, सुमित और बबलू के साथ मिलकर साइबर ठगों का गिरोह बना लिया। सचेंद्र के नाम से एसआर संस एंड ग्रुप्स ट्रस्ट बनाया। ट्रस्ट में बेनिफिशयली खाते जुड़वाकर साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर कराते थे। ठगी की रकम से 15 प्रतिशत सचेंद्र रख लेता था। बबलू, राजकुमार और आशीष लोगों को लालच देकर खाते खुलवाते थे और ठगी की रकम डलवाने में सहयोग करते थे। ठगी की अधिकतर रकम सुमित रख लेता था।
गैंग से मिला खातों के प्रपत्र और इलेक्ट्रानिक उपकरण का जखीरा
सीओ प्रथम ने बताया कि पुलिस को गैंग के पास से हथियार, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और बैंक खातों से संबंधित प्रपत्रों का जखीरा मिला है। शाकिब से पुलिस ने लैपटॉप, एक तमंचा, दो कारतूस, 240 रुपये मिले। राजकुमार के पास से आईफोन, सचेंद्र के पास मिले बैग से कई चेकबुक, दो मोबाइल, एक ट्रस्ट की मोहर, ट्रस्ट के दस्तावेज, एक आधार कार्ड, दो पैनकार्ड, कई डेबिट कार्ड और 200 रुपये बरामद हुए। आशीष के पास से एक मोबाइल, 130 रुपये, यूजर आईडी, पासवर्ड, पिन, जुनैद के आधार की प्रतिलिपि आदि दस्तावेज बरामद हुए। वहीं बबलू के पास से एक तमंचा, दो कारतूस, दो मोबाइल, 510 रुपये बरामद हुए।
ट्रस्ट के 22 खातों से की देशभर में ठगी, सैकड़ों शिकायतें
सीओ प्रथम ने बताया कि डॉक्टर सचेंद्र के एसआर संस एंड ग्रुप्स ट्रस्ट में शातिरों ने 22 बेनिफिशयल खाते जोड़े। केरल राज्य के कई खातों को भी ट्रस्ट से जोड़ा गया था। इनमें देश भर से ठगी कर करोड़ों रुपये ट्रांसफर किए गए। ठगी होने पर तमाम राज्यों में इन खातों की शिकायतें भी हुई। जब पुलिस ने समन्वय पोर्टल पर ट्रस्ट के खाते की जानकारी डाली तो पता चला कि एनसीआरपी पोर्टल पर इन खातों की सैकड़ों शिकायतें विभिन्न राज्यों में हुई है। 1.55 करोड़ रुपये ट्रेडिंग धोखाधड़ी से हड़पे गए थे। चूंकि खाता ट्रस्ट के नाम है और पांच करोड़ की लिमिट है, इसलिए इसमें करोड़ों रुपये के लेनदेन पर न तो आसानी से होल्ड लगता था और न ही बैंक या किसी एजेंसी की नजर जाती थी।
एपीके फाइल, ट्रेडिंग निवेश, डिजिटल अरेस्ट थे साइबर ठगों के हथियार
इंस्पेक्टर संजय धीर ने जांच में पाया कि गिरोह के सदस्यों को सुमित ठगी की ट्रेनिंग देता है। सुमित से चीन के साइबर ठगों का भी गठजोड़ है। शाकिब के मोबाइल में सुमित की व्हाट्सएप चैट मिली। इसमें सुमित ने एसएमएस लिसनर नाम की एपीके फाइल बनाकर भेजी थी। इस फाइल के जरिये ठगी की ट्रेनिंग दी गई थी। सचेंद्र ने भी गिरोह के सदस्यों को ठगी की ट्रेनिंग दी थी। गिरोह के पास मिली डिवाइस से बड़ी मात्रा में ठगी का डाटा मिला है। गिरोह के सदस्य एपीके फाइल भेजकर, ट्रेडिंग निवेश और डिजिटल अरेस्ट कर ठगी करते थे। कई हथकंड़ों से लोगों को शिकार बनाया जा रहा था। सीओ ने बताया कि अब सुमित की तलाश की जा रही है।