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पहले कब्जे करा दिए...अब हटाने के नाम पर फूल रहीं पालिका की ‘सांसें’

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बड़े बाजार में व्यापारियों द्वारा नाले पर किया गया अतिक्रमण। संवाद - फोटो : BADAUN
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बदायूं। नालों की सफाई के लिए नगर पालिका भले ही कितने भी दावे कर ले लेकिन सच्चाई यही है कि जब तक नालों पर बना स्थायी अतिक्रमण गिराया नहीं जाएगा तब तक नालों की सफाई हो ही नहीं सकती। यह भी सच्चाई है कि हर बार नालों पर किया गया अतिक्रमण ध्वस्त कराने की चेतावनी देने वाली पालिका के यह बस के बाहर की बात है। अब तो हाल ये है कि अतिक्रमण हटाओ अभियान के नाम पर ही पालिका की सांसें फूलने लगती हैं।
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इतने सालों में पालिका अधिकारियों की अनदेखी और मिलीभगत के चलते इन स्थायी अतिक्रमणों को कभी हटाया नही जा सका। इसका परिणति जलभराव के रूप में सामने आई जिसे बारिश के हर मौसम में शहर की जनता झेलती है। बारिश में हर बार शहर का बुरा हाल हो जाता है। वैसे तो हर साल नालों की सफाई का दावा किया जाता है लेकिन सच्चाई ये है कि हर बार सफाई के नाम पर केवल औपचारिकता ही पूरी की जाती है। हर बार नालों की सफाई के नाम पर लाखों के बजट का गोलमाल कर लिया जाता है, जिसके कारण हर साल शहर की सड़कों पर जलभराव होता है। कई जगहों का तो यह आलम हो जाता है कि जरा सी बारिश में घुटनों तक पानी भर जाता है। सच्चाई ये है कि आज तक सफाई के नाम पर केवल गोलमाल ही किया गया।
पालिका प्रशासन ने ही कराए कब्जे, हर बार हुई अनदेखी
- वैसे तो नगर पालिका प्रशासन द्वारा अवैध कब्जों के खिलाफ लगातार कागजों पर कार्रवाई चलती रहती है, पर जमीनी स्तर पर यह कहीं दिखाई नहीं देता। वहीं पालिका प्रशासन इस बात से इनकार करता है कि उसकी इन कब्जों को लेकर कोई साठगांठ रही पर यह भी सच्चाई है कि यदि पालिका के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत नहीं रही तो फिर इतने बड़े पैमाने पर नालों पर अतिक्रमण कैसे हुए। शहर के इंडियन बैंक रोड, छह सड़का, सुभाष चौक, लालपुल, पनबड़िया आदि स्थानों पर यह समस्या अब नासूर बन चुकी है।
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- शहर में नाले-नालियों पर लोगों ने जो कब्जा कर लिया है, उसे हटवाया जा रहा है और आगे भी हटवाया जाता रहेगा, ताकि बारिश से पहले नालों की ठीक से सफाई कराई जा सके। हालांकि शहर में लगातार नालों की सफाई का काम चल रहा है। हाल ही में घंटाघर से चूना मंडी तक अभियान चला था, आगे भी इसे जारी रखा जाएगा।
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-दीपमाला गोयल, पालिकाध्यक्ष
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