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हिस्ट्रीशीटर जगपाल ने सिपाही के हत्यारोपी को गोली मारी

Thu, 15 Oct 2015 01:35 AM IST
बरेली
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बरेली। कैंट इलाके में खुलेआम खनन का कारोबार कराने वाले हिस्ट्रीशीटर जगपाल यादव ने सिपाही अनिरुद्ध के हत्यारोपी बबलू को अपने पिता की हत्या के मामले में समझौता न करने पर गोली मार दी। घायल को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एसपी सिटी और सीओ चतुर्थ ने अस्पताल पहुंचकर बबलू के बयान दर्ज किए।
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  कैंट क्षेत्र के गांव बभिया निवासी छोटे लाल की वर्ष 2005 में रंजिशन हत्या हुई थी। इसमें हिस्ट्रीशीटर जगपाल यादव आदि जेल गए थे। जगपाल तो जमानत पर छूट गया, लेकिन उसके साथी अभी जेल में हैं। हत्याकांड में छोटे लाल का पुत्र बबलू मुख्य गवाह है। बबलू भी वर्ष 2013 में बभिया में हुए सिपाही अनिरुद्ध हत्याकांड में जेल गया था और छह महीने पहले ही छूटकर आया था। हिस्ट्रीशीटर जगपाल उस पर समझौते का दबाव बना रहा था। वहीं, बबलू उसके खनन के कारोबार में अड़ंगा लगाते हुए विरोध कर रहा था, जिससे हिस्ट्रीशीटर उससे दोहरी रंजिश मानने लगा। बुधवार शाम साढ़े पांच बजे जगपाल ने खेत से लौट रहे बबलू पर फायरिंग कर हमला बोल दिया। गोली बबलू की पीठ पर लगते हुए कंधे के नीचे से बाहर निकल गई। गोली मारने के बाद हिस्ट्रीशीटर भाग गया। घायल बबलू को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसकी हालत नाजुक बताई जा रही है। एसपी सिटी समीर सौरभ ने बताया कि बबलू को रंजिशन गोली मारी गई है। हिस्ट्रीशीटर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की कोशिश में दबिश दी जा रही है।
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सिपाही प्रदीप को भी गोली मार चुका है जगपाल
वर्ष 2013 में अनिरुद्ध मर्डर केस से दो महीने पहले हिस्ट्रीशीटर जगपाल यादव ने गांव बभिया पहुंचे सिपाही प्रदीप यादव को भी गोली मारकर जख्मी कर दिया था। तब से उसका हौसला और बुलंद हो गया।
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सपा के एक नेता का है संरक्षण
जगपाल यादव को सपा के एक नेता का संरक्षण प्राप्त है। इसी वजह से चुनाव के बावजूद पुलिस उस पर कोई कार्रवाई नहीं की, जबकि छोटे बदमाशों पर गुंडा एक्ट की कार्रवाई हुई।  
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पचास बदमाशों पर करो गुंडा एक्ट की कार्रवाई
एसपी सिटी समीर सौरभ ने इंस्पेक्टर कैंट को हड़काते हुए पूछा कि उन्होंने चुनाव के मद्देनजर हिस्ट्रीशीटर जगपाल यादव के खिलाफ गुंडा एक्ट की कार्रवाई किसके दबाव में नहीं की। इंस्पेक्टर इसका जवाब नहीं दे पाए। उन्होंने कहा कि बृहस्पतिवार तक बभिया के पचास बदमाशों के खिलाफ गुंडा एक्ट की कार्रवाई चाहिए।
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ग्रामीण बोले, सात लाख रुपया जाता है कैंट थाने
घटना के बाद अस्पताल पहुंचे बभिया के ग्रामीणों ने बताया कि हिस्ट्रीशीटर जगपाल यादव की पचास ट्रैक्टर-ट्राली हर रोज अवैध खनन में लगती हैं। इसका करीब सात लाख रुपया कैंट थाने को जाता है। इसी वजह से पुलिस कार्रवाई नहीं करती है। ग्रामीणों का कहना है कि हिस्ट्रीशीटर के डर से कोई आवाज नहीं उठाता है।
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दरोगा दे चुके हैं चौकी से हटाने की अर्जी
बभिया के हिस्ट्रीशीटरों की दहशत से ग्रामीण ही नहीं, पुलिस भी खौफजदा है। इस चौकी पर सिर्फ एक सिपाही और एक दरोगा हैं, जबकि क्षेत्र में करीब 74 हिस्ट्रीशीटर हैं। दरोगा ने पीएसी की मांग की, लेकिन नहीं मिली तो उन्होंने खतरा जताते हुए पिछले दिनों चौकी से तबादला करने का उच्चाधिकारियों से अनुरोध भी किया था।
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