बरेली। खाने से पहले हाथ धोया क्या...। टीवी पर आजकल यह विज्ञापन खूब चल रहा है। डॉक्टर बताते हैं कि 65 फीसदी पेट की बीमारी गंदे हाथाें की वजह से होती है। भोजन को मुंह तक ले जाने वाले हाथ कितने गंदे हैं इसका अनुमान भी लगाना बहुत मुश्किल हैं। हाथ में दो तरह के कीटाणु 24 घंटे मौजूद रहते हैं इसलिए हाथों को साफ रखना जरूरी है।
गमलों में मिट्टी भरी और सादे पानी से हाथ धो लिया। रेस्टोरेंट में गए हाथ धोया, पोछा और मेन्यू कार्ड पकड़कर आर्डर दे दिया। कुछ चम्मच से तो कुछ हाथ से खा लिया। मोबाइल को हाथ में पकड़े रहना, अगर किसी दूसरे के हाथ मोबाइल गया तो उसने भी झट से पकड़ लिया। यह सब कुछ ऐसे काम हैं जिनको करने से पहले और बाद में अधिकतर लोग कुछ नहीं सोचते। डॉक्टर सुदीप सरन के अनुसार दो तरह के हाथ होते हैं। पहला दूषित और दूसरा संक्रमित। दूषित हाथ तो धूल, मिट्टी से होता है जो किसी भी ग्लिसरीन युक्त साबुन से धोने पर साफ कर सकते हैं लेकिन संक्रमित हाथ में असंख्य कीटाणु होते हैं जिन्हें धोने के लिए 10 सेकेंड देना जरूरी है।
दो तरह कीटाणु देते हैं तकलीफ
हाथ में सेफिलोकोपाई और क्लोस्ट्रिडिया कीटाणु हमेशा मौजूद रहते हैं। यह अगर पेट में गए तो तकलीफ पैदा करते हैं इसलिए हाथों को धोने के बाद साफ तौलिये से पोछना चाहिए। अच्छा हो कि हाथ को हवा में सुखाएं।
बढ़ गया है हाथ धुलवाने का बाजार
आजकल स्कूलों में भी हाथ धुलवाने की ट्रेनिंग दी जाती है। हाथ कैसे धोएं इसके बारे सरकारी स्कूलों में चित्र बनाए गए हैं। हालांकि वहां साबुन ढूंढे नहीं मिलता। हाथ को साफ करने के लिए लिक्विड हैंडवाश का बाजार खूब बढ़ा है। सेनेटाइजर की बिक्री तो अच्छी खासी हुई है। ड्रग एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश रस्तोगी बताते हैं कि पहले मार्केट बिल्कुल कम था। अब तो बूम आया है। हर जेब में सेनेटाइजर है। पेपर सेनेटाइजर भी बाजार में हैं।
कैसे बचें
हाथ धोने के बाद क्रीम या माइश्चराइजर जरूर लगाएं, इससे संक्रमण जल्दी हाथ में नहीं होता
हर व्यक्ति की अलग क्रीम हो, नहाने से पहले साबुन साफ कर लें क्याेंकि उसमें कीटाणु बैठ जाते हैं
नोट और मोबाइल छुएं तो हाथ जरूर धोएं
आईवीआरआई के पशु जनस्वास्थ्य विभाग के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सत्यवीर सिंह मलिक ने बताया कि नोट और मोबाइल को छूने के बाद हाथ जरूर धोना चाहिए, क्योंकि इससे जीवाणु और विषाणु जनित संक्रमण होता है। इससे खूनी दस्त, किडनी फेल, पेशाब में रक्त आना, हैजा, उल्टी, मियादी बुखार, पीलिया, उल्टी आदि बीमारियां फैलती हैं। नेपाल में हुए एक अध्ययन के मुताबिक, रुपये के नोट पर 87 फीसदी मल में पाए जाने वाले कोलीफार्म के कीटाणु मिले और 79 फीसदी मवाद वाले बैक्टीरिया पाए गए। मतलब अगर रुपये के नोट को छूने के बाद धुलकर खाना नहीं खाएंगे तो इससे होने वाली बीमारियां हो सकती हैं। इसकी अपेक्षा सिक्कों में कीटाणु कम मिले, क्योंकि धातुओं की वजह से सिक्का ज्यादा संक्रमित नहीं हो पाता। यही वजह है कि इससे बचने के लिए ही इग्लैंड 2016 में प्लास्टिक की करेंसी शुरू करने जा रहा है।