बरेली। चार पुलों के निर्माण के साथ ट्रंक सीवर लाइन के लिए खुदाई करते वक्त एनजीटी की गाइड लाइन की सिरे से अनदेखी कर शहर में प्रदूषण को रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ा देने के मामले में आखिरकार नगर निगम के अफसरों की नींद खुल गई है। नगर निगम की ओर से एनजीटी के नियमों का पालन न करने पर सेतु निगम और जल निगम पर एक-एक लाख का जुर्माना डाला गया है। इसके बाद जल निगम के अफसरों ने भी ठेकेदार पर दबाव बढ़ाते हुए काफी की रफ्तार बढ़ाने की चेतावनी दी है।
शहरी इलाके में फिलहाल लाल फाटक क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज, चौपुला और सेटेलाइट चौराहे पर फ्लाईओवर और आईवीआरआई क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज का निर्माण चल रहा है। इसके अलावा ट्रंक सीवर लाइन डालने के लिए सड़कों की खुदाई भी की जा रही है। तय लक्ष्य के मुताबिक काफी धीमी रफ्तार से चल रही इन परियोजनाओं पर जहां-जहां काम हो रहा है, वहां तो सड़कें बुरी तरह उखड़ ही चुकी हैं, इसके अलावा तमाम दूसरे इलाकों में भी टूटी-उखड़ी सड़कों की मरम्मत और निर्माण काफी समय से अटका हुआ है। इन सड़कों से दिन भर धूल के गुबार तो उड़ते ही हैं, बाकी कसर निर्माण एजेंसियों ने एनजीटी की गाइड लाइन को ताक पर रखकर पूरी कर दी है। नतीजा यह है कि पूरा शहर भयंकर प्रदूषण की चपेट में है। लगातार बढ़ता प्रदूषण उन इलाकों तक भी पहुंच रहा है जो अब तक इससे मुक्त थे।
प्रदूषण के मामले में बरेली के करीब साल भर से देश के शीर्ष शहरों में बने रहने के बाद अब जाकर नगर निगम के अफसर जागे हैं। नगर आयुक्त ने कुछ दिनों पहले एक टीम गठित करके शहर में प्रदूषण के कारणों की पड़ताल करने का निर्देश दिया था। इसी की रिपोर्ट के आधार पर पहली बार निर्माण कार्य के दौरान प्रदूषण पर नियंत्रण न रखने के मामले में सेतु निगम और जल निगम पर एक-एक लाख का जुर्माना डाला गया है। जुर्माना पड़ने के बाद जल निगम ने भी ठेकेदार पर सख्ती दिखाई है। एक्सईएन संजय कुमार ने उसे काम की रफ्तार बढ़ाने के साथ एनजीटी की गाइड लाइन का पालन करने का भी निर्देश दिया है। चेतावनी दी है कि इसमें लापरवाही पर कार्रवाई की जा सकती है।
प्रदूषण का स्तर कम नहीं हुआ तो आगे और सख्त कार्रवाई
नगर निगम ने दोनों विभागों पर जुर्माना लगाने के बाद सख्ती से हिदायत दी है कि निर्माण कार्य के दौरान पानी का लगातार छिड़काव किया जाए। अगर प्रदूषण के स्तर में कमी नहीं आई और शहर के लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा तो आगे और सख्त कार्रवाई की जाएगी। नगर आयुक्त अभिषेक आनंद ने बताया कि निरीक्षण में यह बात साफ हुई है कि निर्माण स्थलों पर पानी का छिड़काव ही नहीं हो रहा है या फिर बहुत कम छिड़काव किया जा है।
इतनी लापरवाही.. सिर्फ चार महीनों में न्यूनतम से अधिकतम स्तर पर प्रदूषण
मार्च में लॉकडाउन के बाद शहर में प्रदूषण का स्तर न्यूनतम से भी निचले स्तर पर आ गया था। मार्च से जून तक शहर में सभी परियोजनाओं पर काम बंद रहा लिहाजा यह स्तर करीब तीन महीने तक बहाल रहा लेकिन जून में ही दोबारा निर्माण कार्य शुरू हुए और इस दौरान निर्माण एजेंसियों ने एनजीटी की गाइड लाइन की इस कदर धज्जियां उड़ाईं कि चार महीनों में ही प्रदूषण फिर उस पुराने स्तर तक पहुंच गया जिसकी वजह से बरेली को देश के टॉप टेन सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में शामिल किया गया था। गनीमतयह रही कि ये चार महीने बारिश के मौसम के थे वर्ना शहर का न जाने क्या हाल होता।
प्रदूषण बढ़ाने में न लोक निर्माण विभाग न खुद नगर निगम कम
प्रदूषण बढ़ाने में पीडब्ल्यूडी और नगर निगम की खुद की भी भूमिका कम नहीं है। शहर भर में ऐसी तमाम सड़कों का सालों से बुरा हाल है जिनकी जिम्मेदारी इन दोनों विभागों पर है। शहर के वायुमंडल को धूल से ढकने में ये सड़कें भी भूमिका निभा रही हैं। बजट होने के बावजूद नगर निगम में तमाम सड़कों की टेंडर प्रक्रिया लंबे समय से जहां की तहां अटकी पड़ी है। पीडब्ल्यूडी सड़कों पर मिट्टी से पैचवर्क कराकर प्रदूषण बढ़ाने का काम कर रहा है। सिस्टम का इतना बुरा हाल है कि नीचे से ऊपर तक कोई अफसर इस धांधली पर ध्यान देने को तैयार नहीं है।