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नई मुसीबत: संक्रमितों की पहचान करने में रैपिड एंटीजन किट फेल

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Corona testing - फोटो : PTI
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तीन दिनों से मिल रही है भ्रामक टेस्ट रिपोर्ट, पता नहीं चल रहा मरीज संक्रमित है या नहीं
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जांच प्रभारी की सूचना पर सीएमओ ने शासन को दी जानकारी, लौटाई जा सकती है खेप

बरेली। कोरोना संक्रमितों को ट्रेस करने के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली रैपिड एंटीजन किट अब सटीक नतीजा देने में फेल साबित हो रही है। तीन दिनों से रैपिड किट से जांच में संक्रमितों की सीटी वैल्यू यानी संक्रमण के स्तर की सही जानकारी नहीं मिल पा रही है। सोमवार शाम जांच प्रभारियों की शिकायत पर सीएमओ ने मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन को इसकी जानकारी दी जहां से ट्रेनर के जरिये किट की जांच कराने और उसके फेल पाए जाने पर नई किट देने की बात कही गई है।
कोरोना संक्रमण को काबू करने के लिए संक्रमितों को तेजी से ट्रेस करना बेहद जरूरी है। लिहाजा, रैपिड एंटीजन टेस्ट किट से संदिग्ध संक्रमितों की जांच शुरू कराने के निर्देश शासन ने दिए है। बीते करीब तीन माह से किट से जांच की जा रही है और परिणाम भी सकारात्मक मिल रहे थे। यानी जो किट में पॉजिटिव थे वह आरटीपीसीआर जांच में भी संक्रमित मिले थे। कुछ दिन पहले मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन ने नई खेप भेजी थी। शुक्रवार को एमएमएयू, तीन सौ बेड अस्पताल के साथ ही तमाम निजी अस्पतालों को भी नई खेप में मिलीं किट सप्लाई की गई। पहले ही दिन किट के जांच में सही परिणाम न देने के कई मामले सामने आए। अगले दिन भी जब कई जांच किट में सटीक परिणाम नहीं मिले तो टीम ने अपने प्रभारियों को जानकारी दी।
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एंटीजन किट से जांच के परिणाम को लेकर शिकायतें मिली हैं। सूचना उच्चाधिकारियों को दे दी गई है। शासन ने ट्रेनर भेजकर किट की जांच कराने को कहा है। इस किट के कारगर न मिलने पर नई किट देने का आश्वासन दिया गया है। - डॉ. विनीत शुक्ल, सीएमओ

आरटीपीसीआर जांच के लिए लिया जाएगा सैंपल

रैपिड एंटीजन जांच किट में खामियां मिलने पर सीएमओ ने जांच प्रभारियों को किट से जांच समेत आरटीपीसीआर जांच के लिए भी सैंपल लेेने के निर्देश दिए हैं। जिसके तहत अब टीम किट की जांच में परिणाम सामने न आने पर आरटीपीसीआर जांच के लिए भी सैंपल ले रहे हैं।

सीटी वैल्यू बताने में नाकाम साबित हो रही किट

कोरोना जांच में सीटी वैल्यू से ही संक्रमण का पता चलता है। चिकित्सकों के मुताबिक, किट से सी और टी दो वैल्यू की जांच की जाती है। इसमें एक लाइन मिलने पर व्यक्ति को निगेटिव माना जाता है। हालांकि, वह निगेटिव है यह महज 30 फीसदी ही सटीक होता है। वहीं, दोनों लाइन दिखने पर व्यक्ति को कोरोना पॉजिटिव माना जाता है। वहीं, यह 95 फीसदी से ज्यादा सटीक माना जाता है। नई किट में यह वैल्यू पता नहीं चल रही है।

दवाओं की भी साल भर से नहीं हुई सैंपलिंग

मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन की ओर से सप्लाई की जा रही दवाएं कारगर हैं या नहीं, इस पर भी सवालिया निशान लगा हुआ है। जिला अस्पताल समेत अन्य सरकारी अस्पतालों में सप्लाई की जा रही तमाम तरह की दवाओं के सैंपल की जांच तक साल भर से नहीं की गई है। नियमानुसार दवाओं के सैंपल की जांच कर उसके स्टैंडर्ड को आंका जाता है। बीते सालों में वायरल बीमारियों के इलाज के लिए सप्लाई हुई तमाम दवाओं क सैंपल फेल हुए थे।
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