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राजेश के इस्तीफे से प्रशासनिक अमले में बेचैनी

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बरेली। राजेश अग्रवाल के इस्तीफे से बरेली की अफसरशाही में भारी बेचैनी का माहौल दिखा। दरअसल माना जाता है कि बरेली में ज्यादातर अफसरों की टीम राजेश अग्रवाल की ही सजाई हुई थी। इसी टीम के जरिये विरोधियों को शिकस्त देने की तैयारी थी, लेकिन अचानक खुद राजेश का पद चला गया।
राजेश का इस्तीफा ऐन उस समय हुआ जब केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार के हमले से परेशान डीएम वीरेंद्र सिंह अवकाश पर हैं। हाल ही में उप निर्वाचन अधिकारी/एडीएम प्रशासन आरएस द्विवेदी लद चुके हैं। जिला कोषागार पहले से निशाने पर है। वरिष्ठ कोषाधिकारी अनवर अहमद की मनमानी की शिकायतें सांसद धर्मेंद्र कश्यप और शहर विधायक डॉ. अरुण कुमार तक कर चुके हैं। यह अलग बात है कि राजेश अग्रवाल ने इन्हें गंभीरता से नहीं लिया। डूडा में विधायक पप्पू भरतौल ने जमकर हंगामा किया था। सेतु निगम, जल निगम और नगर निगम की है। पुलिस-प्रशासन के ज्यादातर आला अफसर राजेश अग्रवाल के अलावा ज्यादा किसी की नहीं सुनते थे। नगर आयुक्त ने मेयर उमेश गौतम और पार्षदों के खिलाफ मुकदमे तक लिखवा दिए। नगर विकासमंत्री सुरेश खन्ना ने तक नगर आयुक्त को हटाने को मुख्यमंत्री को लिखा मगर कमिश्नर ने मेयर और नगर आयुक्त का हाथ मिलवा दिया। अब प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि राजेश अग्रवाल के इस्तीफे का असर जल्द ही अफसरशाही पर भी दिखेगा।
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पांच वोट का रिकार्ड गुल खिलाएगा
कालीबाड़ी के एक बूथ पर भाजपा को एक स्थान से सिर्फ पांच वोट मिलने का तूफान अभी थमा नहीं है। वित्तमंत्री ने भले ही इस्तीफा दे दिया हो लेकिन जिला निर्वाचन अधिकारी/डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह ने अभी तक केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार के पत्र का उत्तर तक नहीं दिया है। हालांकि डीएम ने रिकार्ड में वोट का आंकड़ा ऊपर नीचे होने की आशंका जरूर जताई है। निर्वाचन से जुड़ा यह विषय गंभीर माना जा रहा है क्योंकि इस लापरवाही ने इस संवेदनशील प्रक्रिया पर ही सवालिया निशान लगा दिया है। निर्वाचन से जुड़े अफसरों का कहना है कि अगर यह मामला शांत नहीं हुआ तो जिला प्रशासन के कुछ अफसर भी निपट जाएंगे।
खूब लड़ी पतंग
 वित्तमंत्री राजेश अग्रवाल के इस्तीफे की चर्चा दोपहर से ही शुरू हो गई थी। शाम होते तक पूरे शहर में खबर फैल गई। कार्यालयों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर चर्चा आम हो गई। लोगों का कहना था कि दोनों की पतंगे काफी समय से पेंच में थी। लेकिन लोकसभा चुनाव में तय हो गया था कि कुछ तो होगा। इस बीच कालीबाड़ी स्थित बाल विष्णु सदन स्कूल के एक बूथ पर भाजपा को सिर्फ पांच वोट मिलने के खुलासे से कुछ बड़ा होने की चर्चांए शुरू हो गई थीं। लोगों ने चुटकी लेते बोले- पेंच तो खूब लड़ा लेकिन कटना तो बड़ी पतंग थी सो कट गई। एक प्रतिष्ठान पर कारोबारी बोले, भाजपा और अन्य दलों में यही फर्क है कि पिछली अखिलेश सरकार ने अपने मंत्रियों को बर्खास्त कर बेइज्जत किया लेकिन योगी सरकार ने विवादित मंत्रियों से इस्तीफे लेकर मामला रफा-दफा कर दिया।
अफसरशाही में पहला विकेट एसएसपी का उड़ा
काफी समय से विधायकों के निशाने पर थे मुनिराज पर राजेश ने नहीं हिलने दिया
पंद्रह दिन पहले पप्पू भरतौल ने कई विधायकों के साथ सीएम से की थी शिकायत
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। राजेश अग्रवाल के वित्त मंत्री पद से इस्तीफे के साथ अफसरशाही में पहला विकेट एसएसपी मुनिराज जी. का गिरा। मुनिराज काफी समय से जिले के ज्यादातर भाजपा विधायकों के निशाने पर थे, हालांकि राजेश अग्रवाल की वजह से कोई उन्हें नहीं हिला पाया। कहा जाता है कि राजेश अग्रवाल पसंद और नापसंद का मुनिराज को इतना ख्याल था कि अक्सर उन पर भाजपा के दूसरे बड़े नेताओं के फोन तक रिसीव न करने के आरोप लगते रहते थे। जनता की समस्याएं तक वह सीधे नहीं सुनते थे। यह काम अपने अधीनस्थ अफसर एएसपी और सीओ के सुपुर्द कर रखा था।
मुनिराज जी. की 14 जुलाई 2018 को बरेली का चार्ज संभालने के करीब एक महीने बाद ही कांवड़यात्रा और फिर मोहर्रम के जुलूस को लेकर बिथरी विधायक राजेश मिश्रा उर्फ पप्पू भरतौल से जंग हुई थी। इसी दौरान विधायक और उनके बेटे व समर्थकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई। तीन महीने पहले अवैध खनन पर बहेड़ी विधायक छत्रपाल की इंस्पेक्टर धनंजय सिंह से जंग छिड़ी तब भी उनके करीबी भाजपा नेता के खिलाफ रिपोर्ट लिखने में पुलिस ने जरा भी हिचक नहीं दिखाई। हाल ही में फरीदपुर विधायक श्यामबिहारी लाल के भांजे को पुलिस ने बंद कर दिया। ये सभी मामले मुख्यमंत्री तक पहुंचे थे। सावन की शुरूआत में जिले के प्रभारी बृजेश पाठक से भाजपा विधायकों ने एसएसपी की शिकायत की थी।
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15 दिन पहले पप्पू भरतौल ने कई विधायकों के साथ लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले थे। उन्होंने अन्य मुद्दों के साथ एसएसपी मुनिराज की शिकायत एसएसपी से की थी। सीएम से मिलने वालों में राजेश मिश्रा के अलावा हमीरपुर के विधायक राकेश गोस्वामी, आगरा के पुरुषोत्तम खंडेलवाल, धौरहरा के बाला प्रसाद अवस्थी, गोला के अरविंद गिरि, ब्रजेश प्रजापति, प्रकाश चंद्र द्विवेदी और जौनपुर बदलापुर विधायक राजेश मिश्रा रहे। मुनिराज जी. कई ऐसे इंस्पेक्टर और दरोगा को थाना प्रभारी बनाने पर भी आरोपों के घेरे में आए जो घूसखोरी के लिए बदनाम हैं। इन घूसखोर थानेदारों को शिकायत के बावजूद नहीं हटाया गया।
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