बरेली। शहर के सियासी इतिहास के पन्ने पलटकर देखे जाएं तो संतोष गंगवार और राजेश अग्रवाल के बीच शह और मात की लड़ाई के तमाम अध्याय आसानी से मिल जाएंगे। दसियों साल पुरानी यह सियासी तनातनी आखिरी राउंड तक चली और योगी मंत्रिमंडल में बदलाव की चर्चाओं के बीच राजेश अग्रवाल के वित्त मंत्री पद से इस्तीफे के साथ तब जाकर निर्णायक स्थिति में पहुंची जब दोनों नेता अपने सियासी जीवन के अंतिम पड़ाव पर हैं। हो सकता है कि यह सिर्फ इत्तफाक हो कि हाल ही में जब वित्त मंत्री ने इस्तीफा दिया, ठीक उसी दौरान संतोष गंगवार ने राजेश अग्रवाल के ‘घर’ यानी कालीबाड़ी के विष्णु बाल सदन बूथ पर लोकसभा चुनाव में भाजपा को सिर्फ पांच वोट मिलने का मुद्दा उठाया। हालांकि इस मुद्दे पर संतोष खेमे में उठी ‘साजिश’ की आशंकाओं का इशारा किधर था, इसका पटाक्षेप भी अब इस्तीफा होने के बाद हुआ।
बरेली में भाजपा के दो दिग्गजों के बीच चल रही खटास की जानकारी हाईकमान को सालों से थी। कई बार ऐसे मौके आए जब दोनों नेताओं को नीचा दिखाने के लिए किसी भी हद तक जाने में कसर नहीं छोड़ी। हाल ही में लोकसभा चुनाव में भी वित्त मंत्री के शहर में न रहने का मामला अंदर ही अंदर मुद्दा बना। विकास की परियोजनाओं की कामयाबी पर क्रेडिट लेने और नाकामी का ठीकरा दूसरे के सिर फोड़ने के मसले भी कई बार सार्वजनिक हुए। पार्टी में ऐसे नेताओं की संख्या भी उंगलियों पर गिनने लायक भी कभी नहीं रही, जिनके इन दोनों दिग्गजों के साथ एक जैसे संबंध हों। दोनों कभी किसी कार्यक्रम में साथ नजर आए हों, हाल-फिलहाल ऐसा नाम भर के लिए हुआ। यूं यह खटास दोनों तरफ से थी और मौका मिलने पर दोनों ने ही अंदरखाने एक-दूसरे पर वार करने में कभी कोई चूक नहीं की लेकिन फर्क बस इतना रहा कि वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल की आक्रामकता अक्सर भांप ली गई जबकि संतोष गंगवार ने कभी इस खटास को जाहिर नहीं होने दिया।
अब वित्त मंत्री पद से राजेश अग्रवाल के इस्तीफे की प्रक्रिया के दौरान विष्णु बाल सदन के बूथ नंबर 290 पर सिर्फ पांच वोट मिलने के मसले पर संतोष गंगवार की ओर से जिला निर्वाचन अधिकारी को लिखी चिट्ठी के पीछे छिपे कूटनीतिक मायने भी तलाशे जा रहे हैं। राजनीति से जुड़ा कोई दिग्गज यह मानने को तैयार नहीं है कि संतोष गंगवार का ध्यान चुनाव के नतीजे आने के तीन महीने बाद इस मुद्दे पर गया। वह भी तब जब यह मामला मतगणना के नतीजे आने के ऐन बाद अखबारों की सुर्खियां भी बना था। यह हर कोई जानता है कि कालीबाड़ी जहां विष्णु बाल सदन है, उसे राजेश अग्रवाल का घर माना जाता है। 14 अगस्त को संतोष गंगवार की ओर से चिट्ठी तब लिखी गई जब प्रदेश मंत्रिमंडल में विस्तार और बदलाव की चर्चा शुरू हो गई थीं। अब यह भी कहा जा रहा है कि वित्त मंत्री के खिलाफ संगठन और सरकार में जिस तरह का माहौल बना था, उसकी वजह से उनका पद हिलने की चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में तेज थीं। ऐसे में संतोष की चिट्ठी ने यही जताया कि सही मौके पर सटीक वार किसे कहते हैं।
जाते-जाते सियासी वार
उम्र 75 की हमारी यानी अब बारी तुम्हारी
मंगलवार को राजेश अग्रवाल की ओर से एक पत्र जारी हुआ जिसमें उन्होंने दो दिन पहले वित्त मंत्री पद से इस्तीफा देने की बात कहते हुए इसका कारण अपनी बढ़ती उम्र को बताया है। उन्होंने लिखा है कि उनकी उम्र 75 साल हो चुकी है, इसलिए पार्टी की रीति-नीति के अनुसार उन्होंने पद से इस्तीफा दिया है ताकि नए और योग्य चेहरों को मौका मिले। बता दें कि बढ़ती उम्र के मुद्दे पर लोकसभा चुनाव में संतोष गंगवार के टिकट पर सवाल खड़े हुए थे। वह भी 70 के लपेटे में हैं। राजेश अग्रवाल ने पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में आस्था जताई है लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम नहीं लिया है।