बरेली। अफसरशाही को इशारों पर नचाने के लिहाज से देखा जाए तो वित्त मंत्री रहते हुए राजेश अग्रवाल बरेली की सबसे ताकतवर शख्सियत थे। आम भाजपाइयों की बात छो़ड़ भी दी जाए तो केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार की भी पकड़ फिलहाल उनसे ज्यादा नहीं थी। इसी कारण भाजपा में राजेश अग्रवाल से अंदरखाने खार खाने वालों की कमी नहीं रही और संगठन और सरकार में धीरे-धीरे उनके खिलाफ माहौल बनता चला गया। नतीजा यह हुआ कि मंगलवार को उनके वित्त मंत्री पद से इस्तीफा देने की बात सार्वजनिक होते ही उनके विरोधी और सक्रिय हो गए। इस्तीफे के कारण खोद-खोदकर निकालने शुरू कर दिए गए। हालांकि हाईकमान स्तर पर यही पुष्टि की गई कि उन्होंने अपनी 75 साल की उम्र को देखते हुए इस्तीफा दिया है। यही कारण राजेश अग्रवाल ने भी अपने पत्र में बताया है।
शहर के भाजपाइयों में मंगलवार को राजेश अग्रवाल के इस्तीफे की चर्चा आम होने के बाद जो माहौल दिखा, उसने यही साबित किया कि राजेश की कुर्सी जाने की खुशी विरोधियों से भी ज्यादा कुछ भाजपाइयों को है। इसी के साथ इस इस्तीफे पर तमाम चर्चाएं भी फैलानी शुरू कर दी गईं। डूडा के करोड़ों के टेंडर अपने रिश्तेदारों को दिलाने और विभागीय ट्रांसफर-पोस्टिंग में भ्रष्टाचार के तमाम ऐसे मामले दबी जुबान से फिर चर्चा में आ गए जिनको लेकर वित्त मंत्री रहते हुए राजेश अग्रवाल पर आरोप लगे लेकिन साबित नहीं हो पाए। प्रचारित तो यह भी किया जा रहा कि भ्रष्टाचार की शिकायतों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ही नहीं पार्टी के कई और वरिष्ठ नेता काफी समय से नाराज थे। कई ऐसे मामले भी चर्चा में आए जो पहले कभी नहीं सुने गए। इनकी पुष्टि किसी स्तर से नहीं हुई। राजेश अग्रवाल ने भी इस संबंध में बात करने के लिए फोन पर की गई कॉल रिसीव नहीं की।
सुनील बंसल से तीखी तकरार
का मामला शाह तक पहुंचा
भाजपा में अंदरखाने राजेश अग्रवाल के पार्टी के संगठन मंत्री सुनील बंसल से कुछ समय पहले फोन पर तकरार होने की अफवाह भी खास चर्चा में रही। बताया गया कि बंसल से राजेश की यह तकरार पार्टी फंड से जुड़े किसी मसले पर हुई थी। इस मामले ने बाद में इतना तूल पकड़ा कि बात गृह मंत्री और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह तक पहुंची। बताया जाता है कि वित्त विभाग के ट्रांसफर-पोस्टिंग में एक महिला की हद से ज्यादा दखलंदाजी को भी हाईकमान ने गंभीरता से लिया। इसका भी ठीकरा राजेश अग्रवाल पर फोड़ने की कोशिश की गई। विरोधियों ने यह तक कहने में गुरेज नहीं किया कि इस मामले में शिकायत भी एक महिला की ही ओर से सीधे मुख्यमंत्री से की गई थी।
रामलाल का पद जाने के बाद
संगठन पर कमजोर हुई पकड़
राजेश अग्रवाल और कुछ समय पहले तक संगठन में राष्ट्रीय संगठन मंत्री रहे रामलाल के बीच नजदीकी संबंधों की बात जगजाहिर है। कहा जाता है कि रामलाल की वजह से ही राजेश अग्रवाल की पार्टी संगठन में भी मजबूत पकड़ थी। बड़े मामलों में रामलाल ही हमेशा उनके पैरोकार बनते रहे और इसी वजह से उन्होंने हर मोर्चा फतेह करने में भी कामयाबी पाई। हाल ही में कुछ वजहों से रामलाल को पार्टी नेतृत्व ने राष्ट्रीय संगठन मंत्री के महत्वपूर्ण पद से हटा दिया था। बताया जा रहा है कि रामलाल के हटने से ही राजेश अग्रवाल जैसे उनसे जुड़े नेताओं की भी संगठन पर पकड़ कमजोर हुई। चर्चा यह भी है कि रामलाल अगर पद से न हटते तो शायद राजेश अग्रवाल के वित्त मंत्री पद से इस्तीफा देने की नौबत नहीं आती।