'कैफ हमारे परिवार के सदस्य'
आला हजरत परिवार के सदस्य और इत्तेहाद-ए-मिल्लत कौंसिल (आईएमसी) के प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां ने मौलाना कैफ को अपना भतीजा बताया है। उन्होंने कहा कि मौलाना कैफ के परदादा अल्लामा हसन रजा खां आला हजरत के सगे नवासे और आला हजरत के छोटे भाई अल्लामा हसन रजा खां के सगे पोते हैं।
इसलिए आला हजरत से इनका रिश्ता दोनों ओर से है। वहीं, मुफ्ती आजम हिंद के नवासे और परिवार के वरिष्ठ सदस्य मौलाना मोहम्मद सिराज रजा खां ने कहा कि मौलाना कैफ आला हजरत के मझले भाई के बेटे हैं। मौलाना कैफ के ताऊ मोहम्मद मुस्तफा रजा के बेटे उवैस रजा खान के बेटे की औलाद हैं।
सोहेब मियां ने विवाद को बताया शर्मनाक
खानकाह रजविया नूरिया तहसीनिया के प्रबंधक सोहैब रजा खां ने कहा कि गरीब नवाज दरगाह और आला हजरत दरगाह के लोगों के बीच का विवाद शर्मनाक और अफसोसजनक है। मसलक-ए-आला हजरत के नारों से अजमेर शरीफ के खादिमों की नाराजगी समझ से परे है। मजार में आस्था रखने वालों को बरेलवी ही माना जाता है। दरगाह पर हाजिरी देने वालों को भी बरेली के बुजुर्गों के तरीके पर अमल करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि गरीब नवाज की बड़ी शान और बड़ा मर्तबा है। वहां हाजिरी अदब से देना चाहिए, न कि शोर गुल और नारेबाजी करें। सलाम से अगर विवाद का अंदेशा है तो दिल में पढ़ सकते थे, इस तरह के झगड़े की नौबत तो न आती। जो कुछ हुआ वह दुखद है। इसका गलत संदेश गया है। खादिम खुद को सूफी बताते हैं, उनका काम है दूसरों की गलती को माफ कर देना है। मगर दरगाह अजमेर शरीफ के खादिमों ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने मारपीट में लिप्त लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।