बड़हेच कबीले के बहुत सारे लोगों ने अफगानिस्तान से आकर उत्तरी भारत के रोहिला बिरादरी के बीच एक जनजातीय समूह बनाया। बाद में यह इलाका रोहिलखंड राज्य के तौर पर जाना गया। मुगल शासन के दौरान आला हजरत के पूर्वज रोहिलखंड राज्य में स्थापित हुए। यहां रह कर आला हजरत और उनके खानदान ने इस्लाम धर्म का प्रचार प्रसार किया। अपनी विचारधारा पूरी दुनिया में फैलाई, जिसकी वजह से बरेली सुन्नियों का मरकज बना।
अपनी खास विचारधारा से पाई पहचान
आला हजरत का आंदोलन लोकप्रिय सूफीवाद का बचाव करता था। ब्रिटिश काल के दौरान दक्षिण एशिया में कहीं देवबंदी, कहीं वहाबी प्रचार का प्रभाव बढ़ गया था। उस दौर में आला हजरत ने बरेलवी मसलक (मत) का आगाज किया। धीरे-धीरे यह आंदोलन भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, तुर्की, अफगानिस्तान, इराक, श्रीलंका, दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन के अन्य देशों के अनुयायियों के साथ दुनिया भर में फैल गया है।
यह आंदोलन शिक्षित भारतीयों और पाकिस्तानियों के साथ-साथ दुनिया भर में दक्षिण एशियाई मुल्कों के बीच लोकप्रिय है। कई धार्मिक स्कूल, संगठन और शोध संस्थान आला हजरत के विचारों को पढ़ते हैं। सूफी प्रथाओं और पैगंबर-ए इस्लाम को व्यक्तिगत भक्ति के अनुपालन में इस्लामी कानून की प्राथमिकता पर जोर देते हैं।