जेहाद के नाम पर आतंकी गतिविधियों में लाखों बेगुनाह लोगों की जान जा चुकी है। करोड़ों लोग तबाह और बर्बाद हो चुके हैं। ऐसे हालात में पहली बार सूफी विचारधारा के उलमा ने साहस करके आतंकी संगठनों के खिलाफ फतवा जारी किया है। यह फतवा बरेली स्थित दरगाह आला हजरत के इस्लामिक रिसर्च सेंटर के निदेशक मौलाना शहाबुद्दीन रजवी की ओर से जारी हुआ है। इस पर देश के विभिन्न शहरों के 14 आलिमों ने भी अपना समर्थन दिया है। इसमें कहा गया है कि हिंदुस्तान जैसे मुल्क के लिए तो शरीयत भी जेहाद की इजाजत नहीं दे सकती, ये नाजायज है।
इस फतवे का खुलासा प्रसिद्ध आलिम मुफ्ती मौलाना शहाबुद्दीन ने तंजीम उलमा इस्लाम के राष्ट्रीय महासचिव की हैसियत से दरगाह आला हजरत स्थित नूरी मेहमान खाने में प्रेसवार्ता के दौरान किया। उन्होंने फतवे के हवाले से कहा हैै कि मौजूदा दौर में इस्लाम के नाम से प्रचारित किए जाने वाले जेहाद की हिंदुस्तान में शरअन जरूरत नहीं है, चूंकि मुल्क में मुसलमानों को मजहबी मसलों पर पूरी आजादी हासिल है। नमाज, रोजा, हज, जकात, निकाह, तलाक, अजान, कुर्बानी, अकीका और इस्लाम के बुनियादी अरकान को अदा करने की आजादी हासिल है, इसलिए जेहाद के लिए जिन शराइत की जरूरत होती है वे यहां नहीं हैं।
मौलाना ने फतवे की तफसील बताते हुए कहा कि कुरान और हदीस की रोशनी में यह साफ है कि जेहाद के नाम पर बनी तंजीमें जैसे अलकायदा, आईएसआईएस, तालिबान, बोकोहराम, लश्करे तइबा और इंडियन मुजाहिदीन आदि इस्लाम के खिलाफ काम कर रही हैं। इस फतवे का समर्थन करने वालों में दिल्ली के मुफ्ती अशफाक हुसैन, राजस्थान के मुफ्ती शाकिर उल कादरी, बंगाल के मुफ्ती मजहरुल इस्लाम, बिहार के मुफ्ती कमरुज्जा, झारखंड के मुफ्ती रियाज अहमद, महाराष्ट्र के मौलाना सईद नूरी, कर्नाटक के मौलाना इब्राहिम, जम्मू कश्मीर के मुफ्ती सखी खां आदि हैं। प्रेसवार्ता के दौरान हाजी नाजिम बेग, मौलाना ताहिर फरीदी, सैयद शाबान अली आदि मौजूद रहे।