सिटी मजिस्ट्रेट और सहायक चकबंदी अधिकारी ने दस दिन के अंदर भूमाफिया पर कार्रवाई का दिया लिखित आश्वासन
दो जनवरी तक कार्रवाई न होने पर फिर अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी
बरेली। गांव रहपुरा जागीर में ग्राम समाज की साढ़े आठ सौ बीघा जमीन को भूमाफिया के कब्जे से मुक्त कराने की मांग को लेकर रविवार देर रात दामोदर स्वरूप पार्क में धरने पर बैठे किसान बुधवार को जिला प्रशासन के लिखित आश्वासन पर दस दिन की मोहलत देकर उठ गए। किसान प्रतिनिधियों ने दस दिन के भीतर सभी 17 बिंदुओं पर ठोस कार्रवाई न होने पर फिर आंदोलन की चेतावनी दी है।
रविवार रात 12 बजे ट्रैक्टर ट्रॉली में सवार होकर मीरगंज क्षेत्र के गांव रहपुरा जागीर के किसान सांसद संतोष गंगवार से मिलने पहुंचे थे। किसानों का कहना था कि गांव की 850 बीघा भूमि पर भूमाफिया ने कब्जा कर लिया है, लेकिन विधायक पैमाइश नहीं होने दे रहे हैं। सांसद ने इस मामले में सहयोग करने से इनकार किया तो किसान सेठ दामोदर स्वरूप पार्क में धरने पर बैठ गए। सोमवार को जिला प्रशासन की ओर से धरना समाप्त कराने की कोशिश की गई पर बात नहीं बनी। मंगलवार को भी कमोवेश यही स्थिति जारी रही। किसानों ने टेंट लगाकर लंगर भी शुरू कर दिया। पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन ने भी किसानों से मुलाकात की और मदद का आश्वासन दिया। मामला बढ़ता देख बुधवार दोपहर करीब डेढ़ बजे जिलाधिकारी के निर्देश पर सिटी मजिस्ट्रेट राजीव पांडेय और एसीओ पुनीत शर्मा किसानों से वार्ता करने पहुुंचे।
किसानों ने उन्हें प्रकरण और मांगों से संबंधित 17 सूत्री मांग पत्र सौंपा। इसमें भूमाफिया से ग्राम सभा की जमीन कब्जामुक्त कराने और हाईकोर्ट में याचिका दायर न करने वाले अवैध कब्जेदारों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग प्रमुख थी। सिटी मजिस्ट्रेट ने उनके मांग पत्र को लेकर इसी माह के आखिर तक नियमानुसार कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। चकबंदी अधिकारी ने भी हाईकोर्ट में काउंटर दाखिल की बात कही।
लिखित सहमति मिली तब माने किसान
मौखिक आश्वासन पर किसान सहमत नहीं हुए और उन्होंने लिखित सहमति देने की बात कही। किसान तीरथराम ने बताया कि अधिकारियों ने लिखित सहमति पत्र दिया है। लिहाजा, दो जनवरी तक का समय अधिकारियों को कार्रवाई के लिए दिया गया है। अगर वह कार्रवाई शुरू नहीं करेंगे तो फिर से धरने पर बैठेंगे और अबकी बार कार्रवाई होने पर धरना से हटेंगे।
धरना खत्म होने पर अफसरों ने किसानों के साथ खाया खाना
आपस में सुलह होने के बाद किसानों ने सिटी मजिस्ट्रेट राजीव पांडेय, एसीओ पुनीत शर्मा को उनके लंगर का खाना खाने के लिए आमंत्रित किया। इस पर अधिकारियों ने उनके साथ खाना खाया। किसानों ने अधिकारियों का आभार जताते हुए उनसे मांगों पर तटस्थ रहने की बात कही। इस पर सिटी मजिस्ट्रेट ने मांगों के सापेक्ष जो भी नियमानुसार और विधि सम्मत कार्रवाई की जा सकेगी, वह हर हाल में कराने का आश्वासन दिया। यही आश्वासन एसीओ ने भी दिया है।
पांच सदस्यीय कमेटी होगी गठित
जिला प्रशासन की ओर से रहपुरा जागीर के किसानों के मामलों की जांच करने के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित होगी। किसानों ने समिति में सिटी मजिस्ट्रेट, एसडीएम मीरगंज, एसओसी चकबंदी, एडीएम एफआर को शामिल किया जाना चाहिए। इनके अलावा उन्होंने किसी अन्य अधिकारी पर भरोसा नहीं है। कहा कि चकबंदी का सारा स्टाफ प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से भूमाफिया और राजनीतिक दलों के दबाव में है, उसे तत्काल तबादला किया जाना चाहिए।
किसानों की प्रमुख मांगें
- मीरगंज की रहपुरा जागीर में चकबंदी सन 1987 से चल रही है। तीन माह में चकबंदी फाइनल कराई जाए।
- ग्राम सभा की भूमि के 192 गाटा रकबा करीब 826 बीघा भूमि को कब्जा मुक्त कराया जाए।
- हाईकोट से स्टे लेने वाले याचिका को माह भर के भीतर खारिज कराए जाने की मांग की।
- सन फसली 1377, 1380, 1383 में जो पट्टे हुए हैं उन्हें दस-दस एकड़ भूमि दिए जाने की जांच कराई जाए।
- श्मशान भूमि, मृत पशु डालने की जगह और नाली, तालाब, रास्ते को कब्जामुक्त कराया जाए।
- जिला प्रशासन की ओर से गठित होने वाली पांच सदस्यीय समिति में किसानों को शामिल किया जाए।
- चक संख्या 680, 681 में जो फर्जीवाड़ा हुआ उसके दोषी अफसर, कर्मचारी बर्खाश्त किए जाएं।
- ग्रामवासियों को विरासत खतौनी चकबंदी विभाग द्वारा निशुल्क कैंप लगाकर बनाया जाए।
- वर्तमान में मौजूद चकबंदी का सारे स्टाफ से न्याय की उम्मीद नहीं है, तबादला किया जाए।