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खाद के लिए मारामारी: बरेली में समिति पर किसानों के बीच हो गई मारपीट, मौके से खिसके सचिव

Tue, 19 Nov 2024 12:35 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

गेहूं की बोआई का सीजन चल रहा है, लेकिन किसानों को खाद के लिए चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। बरेली जिले की कई समितियों पर खाद नहीं है, जहां उपलब्ध है वहां किसानों की भारी भीड़ उमड़ रही है। मंगलवार को सुनौर देशनगर साधन सहकारी समिति पर खाद के लिए किसानों में मारपीट हो गई। 
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सहकारी समिति पर उमड़ी किसानों की भीड़ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली के भदपुरा ब्लॉक की सुनौर देशनगर साधन सहकारी समिति पर मंगलवार को खाद के लिए कतार लगाए किसानों में मारपीट हो गई। किसान सुबह छह बजे से ही कतार में लगे रहे। दोपहर एक बजे तक सचिव नहीं पहुंचे थे। इस दौरान कतार में धक्का-मुक्की के बाद मारपीट शुरू हो गई। बताते हैं कि मारपीट के दौरान सचिव भी पहुंच गए थे, लेकिन हालात बिगड़ते देख वह दूर से ही खिसक लिए। पुलिस ने किसानों को शांत कराया। उनको खाद के बिना ही लौटना पड़ा।

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प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि समिति पर खाद (डीएपी) आने की सूचना पर सुबह छह बजे से ही आसपास के गांवों के किसान वहां पहुंचने लगे थे। सुबह 11 बजे तक वहां 400 से ज्यादा किसान लाइन लगाकर खड़े हो गए। जल्दी आगे पहुंचने की होड़ में कुछ किसानों ने दूसरी लाइन भी लगा ली। इसके बावजूद किसान बीच में घुसते जा रहे थे। दूसरी ओर, सचिव के न आने से भी किसानों का गुस्सा बढ़ रहा था। दोपहर एक बजे तक किसानों में धक्का-मुक्की और मारपीट शुरू हो गई। 

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इससे लाइन में लगे किसान भाग खड़े हुए। बताया जा रहा है कि उसी दौरान सचिव समिति पर पहुंचे थे, लेकिन दूर से ही हालात देखकर खिसक लिए। वह समिति का गेट खोलने तक की हिम्मत नहीं जुटा सके। मौके पर पहुंची पुलिस ने जैसे-तैसे किसानों को शांत कराया। शाम करीब पांच बजे तक किसान खाद का इंतजार करते रहे। इसके बाद खाली हाथ लौट गए।

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तीन दिन से लगा रहे चक्कर
मटकापुर निवासी किसान सत्यदेव ने बताया कि वह तीन दिन से रोजाना खाद के लिए लाइन लगा रहे हैं, लेकिन एक दाना भी नहीं मिला। खाईखेड़ा के किसान अजत पटेल ने बताया कि वह मंगलवार सुबह छह बजे आ गए थे। दोपहर में मारपीट हो गई। इससे सचिव दूर से ही भाग गया। उन्हें डीएपी नहीं मिल पाई। किसान राजीव, रामचंद्र, सर्वेश और राजू पटेल ने सचिव पर मनमानी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सचिव खास लोगों को ही खाद दे रहे हैं।
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