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Bareilly News: नई टाउनशिप के लिए बीडीए जबरन छीन रहा खेत, किसान बोले- हम जान दे देंगे पर जमीन नहीं

Fri, 29 Aug 2025 01:28 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

बरेली के गांव अड़ूपुरा जागीर, कुम्हरा और अहिलादपुर के किसानों में बीडीए के खिलाफ रोष है। आरोप लगाया कि बीडीए नई टाउनशिप के लिए जबरन उनके खेत छीन रहा है। किसानों ने कहा कि वह जान दे देंगे, लेकिन अपनी जान नहीं देंगे। 
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किसानों ने कहा- बीडीए को नहीं देंगे जमीन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) पीलीभीत बाइपास के किनारे नई टाउनशिप विकसित करने की तैयारी में है, लेकिन किसान जमीन देने के लिए सहमत नहीं हैं। 21 साल पहले चंदपुर, बिचपुरी व अन्य गांवों में बीडीए की ओर से किए गए अधिग्रहण से प्रभावित किसानों का हवाला देते हुए भू स्वामी प्राधिकरण पर विश्वास नहीं होने की बात कह रहे हैं। 

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तीन दिन पहले अधिग्रहण के लिए सहमति लेने पहुंचे लेखपाल-कानूनगो के सामने किसानों ने बीडीए के विरुद्ध नारेबाजी भी की थी। इसकी वजह जानने के लिए बृहस्पतिवार को मामले की पड़ताल की गई तो किसान बीडीए के प्रति काफी उग्र दिखे। इस संबंध में पक्ष जानने के लिए बीडीए उपाध्यक्ष डॉ. मनिकंडन ए को कॉल की गई। उन्होंने कॉल रिसीव कर पूरी बात सुनी, फिर जवाब दिए बगैर कॉल डिस्कनेक्ट कर दी।

बीडीए को जमीन देने का मतलब है बच्चों को कटोरा पकड़ाना
नई टाउनशिप के दायरे में आ रहा अड़ूपुरा जागीर गांव पीलीभीत मार्ग से एक किमी दूरी पर नहर किनारे है। सिंचाई के साधन अच्छे होने से यहां की जमीन बेहद उपजाऊ है। पड़ोस में एयरपोर्ट और बरेली महानगर होने से गांव की जमीन बहुमूल्य है। दोपहर ढाई बजे यहां प्राथमिक स्कूल के पास सड़क के किनारे 30-35 किसान बैठकर बीडीए से अपने खेत बचाने पर चर्चा कर रहे थे। 
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किसानों ने बताया कि उनके गांव में दो दिन पहले लेखपाल आकर बीडीए का लॉलीपॉप समझा रहे थे। हमने जमीन देने को मना कर दिया है। वर्ष 2005 में बीडीए ने चंदपुर, बिचपुरी के किसानों की जमीन ली थी, पर मुआवजा अब तक नहीं दिया। बीडीए को जमीन देने का मतलब है बच्चों के हाथ में कटोरा पकड़ाना। कहा, मुआवजा कुछ भी हो, हम किसी कीमत पर अपने खेत बीडीए को नहीं देंगे। प्रशासन ने जबरदस्ती की तो जान दे देंगे।

'जबरन जमीन लेने की फिराक में है प्राधिकरण'
शहर से सटा गांव कुम्हरा भी लखनऊ-दिल्ली हाईवे से सटा है। एयरपोर्ट से सिर्फ डेढ़ किमी दूर होने के कारण गांव की संपूर्ण जमीन बेशकीमती है। खेतों में फसलें लहलहा रही हैं। दोपहर एक बजे पंचायत भवन परिसर में ग्राम प्रधान अजीत  सिंह व गांव के अन्य किसान मौजूद थे।  

ग्राम प्रधान ने बताया कि उनके गांव की जमीन बीडीए की नई टाउनशिप के दायरे में आ रही हैं। प्राधिकरण किसानों से जबरन जमीन लेने की फिराक में है। वर्ष 2019 में हमने अपनी कुछ जमीन को उप्र राजस्व संहिता की धारा-80 के तहत अकृषक घोषित कराया है, लेकिन बीडीए का कहना है कि जो जमीन वर्ष 2004 से पहले अकृषक घोषित हुई होगी, उसी का मुआवजा बढ़ी दरों पर दिया जाएगा। रूपराम ने कहा कि यदि बीडीए जबरन हमारी जमीन छीनने का प्रयास करेगा तो उसके लिए कानून है। गांव के सभी लोग मिलकर यह लड़ाई लड़ेंगे।

अड़ूपुरा जागीर के प्रधान धनपाल सिंह और गांव कुम्हरा के प्रधान अजीत सिंह - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
'किसानों के बीच विश्वास खो चुका है प्राधिकरण'
अड़ूपुरा जागीर के प्रधान धनपाल सिंह ने कहा कि जमीन लेने के बाद बीडीए किसानों को समय से मुआवजा देगा, प्राधिकरण यह विश्वास खो चुका है। रामगंगानगर बसाने में उसने बिचपुरी जैसे कई गांवों के हजारों किसानों की जमीन ली और मुआवजा भी नहीं दिया। वह लोग कोर्ट-कचहरी के धक्के खा रहे हैं। इसलिए हमारे गांव के दो सौ किसान बीडीए को जमीन नहीं देंगे। 

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कुम्हरा के प्रधान अजीत सिंह ने कहा कि दो दिन पहले बीडीए कार्यालय में हम लोगों को बुलाया गया था। वहां बात रखी है कि वह क्षेत्र के विकास में बाधा नहीं बनेंगे, लेकिन यदि बीडीए की तरफ से दिया जाने वाला मुआवजा उचित नहीं होगा तो हमारे गांव का कोई भी किसान किसी भी कीमत पर बीडीए को अपनी जमीन नहीं देगा। 

डेढ़ करोड़ रुपये बीघे बिक रही जमीन, बीडीए ने 70 लाख लगाई कीमत
हाईवे से सटे मेरी 10 बीघे जमीन है। इसकी कीमत डेढ़ करोड़ रुपये प्रति बीघे है, पर बीडीए ने 70 लाख रुपये दाम लगाया है। तीन दिन पहले लेखपाल-कानूनगो सहमति पत्र लेने आए थे पर किसानों ने इन्कान्कर दिया। - मदन लाल साहू, अहिलादपुर

हाईवे और लिंक रोड से लगी हमारी दो बीघे जमीन की कीमत करोड़ों में है और बीडीए कौड़ियों के भाव में चाहता है। हमारा खेत बीडीए तभी ले पाएगा, जब वह हमारी जान ले ले। कम कीमत पर हम जमीन नहीं देंगे। - पप्पू पटेल, अहिलादपुर

मेरे पास 20 बीघे जमीन है। हमें कुछ भी नहीं चाहिए। बीडीए को हम किसी भी कीमत पर जमीन नहीं देंगे। लेखपाल-कानूनगो से साफ कह दिया है दोबारा परेशान करने मत आना। जोर-जबरदस्ती की तो आंदोलन किया जाएगा। - रामप्रसाद, अहिलादपुर

हाईवे के किनारे मेरी दो बीघे जमीन है। नई टाउनशिप बनाकर बीडीए हमें भूमिहीन करने पर आतुर है। मुझे पता है कि ये न मुआवजा देंगे न कोई अन्य वादा पूरा करेंगे। इसलिए हम किसी कीमत पर बीडीए को जमीन नहीं देंगे। - विजय सिंह, अहिलादपुर

हाईवे के पास मेरी नौ बीघे जमीन पर बीडीए घात लगाए बैठा है। लेखपाल-कानूनगो को सहमति लेने के लिए दौड़ा रहा है, पर हम तैयार नहीं। खेती-किसानी हमारे जीवन का आधार है। उसे किसी भी कीमत पर जाने नहीं देंगे। - किशन नरायन, अहिलादपुर

हाईवे पर हमारी 57 बीघे जमीन लेने के लिए बीडीए जबरदस्ती कर रहा है्। यदि बीडीए नहीं मानेगा तो हम खेती बचाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। किसी कीमत पर जमीन नहीं देंगे। हमें इतनी ही जमीन बीडीए दूसरी जगह दे तो इसे ले ले। - धर्मपाल, अहिलादपुर
 

खेती बीडीए को देकर क्या बच्चों के हाथ में कटोरा थमा दें। यदि जमीन के लिए बीडीए ने दबाव बनाया तो कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। जान दे देंगे, पर जमीन नहीं देंगे। 10 बीघे खेती है, जिसे अपने बच्चों को ही देंगे। - रामदास यादव, अड़ूपुरा जागीर

मेरी 15 बीघे जमीन है। लेखपाल-कानूनगो को बता दिया है कि दोबारा सहमति लेने मत आना। मूल्य कोई भी हो, हम जमीन नहीं देंगे। बीडीए के अधिकारियों ने पहले के अधिग्रहण में विश्वास खो रखा है। - केहरी सिंह, अड़ूपुरा जागीर

मेरी आठ बीघे जमीन है। हमें मुआवजा नहीं चाहिए। चंद्रपुर, बिचपुरी के किसानों को देख चुके हैं कि उन्हें कितना मुआवजा मिला है। लेखपाल आए थे। कह रहे थे खल्लर वाली जमीन का चार प्रतिशत पैसा कटेगा। - बेचे लाल, अड़ूपुरा जागीर

बीडीए वाले बैनामा करा लेते हैं, पर मुआवजा देते कहां हैं? 21 साल हो गए हैं, बिचपुरी के चार किसानों के 114 करोड़ रुपये मुआवजा बाकी है। - ब्रजेश कुमार, अड़ूपुरा जागीर 

बीडीए टाउनशिप बसाए, हमें एतराज नहीं है, लेकिन हमारी जमीन न छीने। ये लोग उचित मुआवजा नहीं देते हैं। हमने रामगंगानगर आवासीय योजना और ग्रेटर बरेली में प्रभावित किसानों का हाल करीब से देखा है। - राम सिंह, अड़ूपुरा जागीर

पहले अंग्रेजों ने लूटा, अब बीडीए लूट रहा
अहिलादपुर के किसान रामबाबू पटेल ने कहा कि पहले अंग्रेज हमें लूटते थे, अब बीडीए लूट रहा है। चंद्रपुर, बिचपुरी के लोग 20 साल बाद भी मुआवजे के लिए तरस रहे हैं। वहां के कई किसान रिक्शा चलाकर गुजर-बसर कर रहे हैं, जबकि मुआवजे की रकम से बीडीए ब्याज कमा रहा है। जिन किसानों ने रामगंगानगर में भूखंड लेकर घर बना लिया है, वह बिजली-पानी के लिए तरस रहे हैं। कई लोग अपना मकान बेच रहे हैं, पर खरीदार नहीं मिल रहे हैं।

मुआवजा न सहमति...बीडीए बेचने लगा भूखंड
अहिलादपुर के ही रहने वाले अमित गौतम ने मोबाइल फोन के स्क्रीन पर बीडीए की नई टाउनशिप का नक्शा दिखाते हुए कहा है कि मुआवजा दूर की बात, अभी किसान ने जमीन  बेचने की सहमति भी नहीं दी है, पर प्राधिकरण ने भूखंड बेचना शुरू कर दिया है। बीडीए 26,500 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से प्लाॅट बेच रहा है। अमित ने बताया उनके बाबा घासीराम के नाम 10 बीघे जमीन है। बीडीए उसका अधिग्रहण करना चाहता है।
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बीडीए ने दबाव बनाया तो राजमार्ग पर लगाएंगे जाम
अहिलादपुर गांव को बीडीए ने नई टाउनशिप में शामिल किया है। लखनऊ-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग से सटा यह गांव एयरपोर्ट से करीब डेढ़ किमी दूर है। यहां की जमीन बेशकीमती है। खेती-किसानी बेहतर होने से गांव के घरों में रौनक दिखती है। यहां के किसान बीडीए को किसी भी कीमत पर जमीन देने के लिए तैयार नहीं हैं। सुबह 11 बजे 20-25 किसान ग्राम पंचायत के सचिवालय में बैठक कर बीडीए को जमीन न देने की योजना बना रहे थे। 

उन्होंने सामूहिक रूप से कहा, बीडीए ने चंदपुर, बिचपुरी व अन्य गांवों के किसानों को बहुत सताया है। जबरन जमीन ले ली। 21-22 साल हो गए, अब तक मुआवजा नहीं दिया। सैकड़ों किसान भूमिहीन होकर मजदूरी कर रहे हैं। अहिलादपुर के किसानों ने कहा, जान दे देंगे पर जमीन नहीं देंगे। जितना हो सकेगा, विरोध करेंगे। बीडीए यदि ज्यादा दबाव बनाएगा तो राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगाएंगे।

बीडीए सचिव वंदिता श्रीवास्तव ने कहा कि प्रस्तावित नई टाउनशिप में किसानों के मामले पर बाद में बात करेंगे। अभी हम व्यस्त हैं।

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