आरोपी कॉलेज संचालक और प्रिंसिपल
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दलाल और विज्ञापनों के जरिये लिए प्रवेश
पुलिस के मुताबिक विनोद और जगदीश ने लखनऊ के स्टेट पैरामेडिकल फैकल्टी का फर्जी संबद्धता प्रमाणपत्र तैयार कर इंस्टीटयूट खोला था। डीएमएलटी, बी फार्मा, डी फार्मा, एएनएम, जीएनएम, ओटी, डीपीटी, एक्सरे, सीएमएस, बीएससी नर्सिंग समेत अन्य कोर्स संचालन का विज्ञापन, बैनर, पोस्टर, होर्डिंग्स, वेबसाइट, सोशल मीडिया आदि के जरिये प्रचार-प्रसार देखकर विद्यार्थियों ने प्रवेश लिए। इसमें दलालों का भी सहारा लिया गया। एडमिट कार्ड जारी किए। करीब छह सौ विद्यार्थियों के प्रवेश का अनुमान है।
80 हजार से दो लाख रुपये तक वसूल रहे थे फीस
गुरुवार दोपहर कॉलेज पहुंची टीम ने विद्यार्थियों को बाहर निकालकर दस्तावेज खंगाले। दो घंटे तक चली जांच के बाद आराेपियों को हिरासत में लेकर अफसर इंस्टीट्यूट में ताला लगाकर रवाना हो गए। विद्यार्थियों को इंस्टीट्यूट के फर्जीवाड़े का पता चला तो वे आक्रोशित हो गए। उन्होंने संचालक के खिलाफ नारेबाजी की। अब तक जमा की गई फीस वापस कराने की मांग की है। विद्यार्थी फारुख खान, अजीम, प्रीति, प्रिंयका, अमान खान, तपेंद्र आदि का कहना था कि कोर्स के अनुसार 80 हजार से दो लाख रुपये तक फीस वसूली गई है।
नाम में लगाया था डॉक्टर तो झांसे में आ गए छात्र
पुलिस के मुताबिक आरोपी विनोद यादव और जगदीश चंद्रा ने अपने नाम के आगे डॉक्टर लगा रखा था। लिहाजा, जो विद्यार्थी प्रवेश के लिए संपर्क करते, झांसे में आ जाते। विद्यार्थियों के मुताबिक सोशल मीडिया पर विनोद ने फर्जी अकाउंट बना लिए हैं।
पेड प्रमोशन के जरिये फॉलोवर्स जोड़ रखे हैं। कॉलेज की वेबसाइट भी फर्जी है। रुहेलखंड विश्वविद्यालय की ओर से परीक्षा कार्यक्रम जारी होने के बाद विद्यार्थियों ने पूछताछ शुरू की तो किसी दलाल को कॉल कर एडमिट कार्ड आदि जारी कराने की बात करता था। दो दिन पहले कॉलेज में प्रदर्शन भी हुआ था।