ड्राइवर को सीएमओ कार्यालय का बाबू बनाकर होमगार्ड के साथ भेजता था वसूली करने
इंटेलीजेंस की टीम ने सीएमओ ऑफिस स्टाफ के साथ ही कई अधिकारियों के लिए बयान
बरेली। सीएमओ कार्यालय में दो साल से सक्रिय वसूली गैंग के खेल की परतें अब उधड़नी शुरू हो गईं हैं। सीएमओ कार्यालय की मुहर लगाकर झोलाछापों को नोटिस देने और निजी क्लीनिकों के फर्जी तरीके से रजिस्ट्रेशन करने वाले गैंग के बारे में छानबीन के दौरान इंटेलीजेंस की टीम को पता चला है कि गैंग का सरगना ही खुद सीएमओ बनकर नोटिस जारी करता था। इसके बाद ड्राइवर को बाबू बनाकर होमगार्ड के साथ वसूली के लिए भेजता था। फिलहाल यह सभी आरोपी फरार हैं।
शुक्रवार को इंटेलीजेंस की टीम दोपहर में सीएमओ कार्यालय पहुंची। करीब दो घंटे तक कार्यालय में मौजूद रहने के दौरान टीम ने अफसरों और कर्मचारियों से वसूली प्रकरण में पूछताछ की। उनके बयान भी दर्ज किए। टीम स्वास्थ्य विभाग में सीएमओ की मुहर और फर्जी हस्ताक्षर से झोलाछापों को नोटिस जारी कर वसूली करने और निजी क्लीनिकों के फर्जी तरीके से रजिस्ट्रेशन करने के मामले की जांच कर रही है। अब तक एक दर्जन से ज्यादा फर्जी नोटिस जारी कर वसूली की जा चुकी है। अब तक की जांच में पता चला है कि गैंग का सरगना ही खुद को सीएमओ बताकर ड्राइवर से वसूली कराता था।
ड्राइवर फर्जी पहचान पत्र दिखाकर जमाता था रौब
दरअसल, बीते दिनों सीएमओ को एक फर्जी पहचान पत्र भी मिला है। फोटोयुक्त इस पहचान पत्र पर सीएमओ की मुहर और हस्ताक्षर भी हैं। हालांकि सीएमओ हस्ताक्षर अपने होने से इनकार कर चुके हैं। पहचान पत्र पर पद फार्मासिस्ट लिखा है। पता मुरादाबाद का दर्ज होने की वजह से इंटेलीजेस ने बरेली के साथ मुरादाबाद में भी जांच शुरू कर दी है। बताते हैं कि यह फर्जी फार्मासिस्ट का पहचान पत्र सरगना के ड्राइवर का ही है, उसकी का फोटो लगा है।
वसूली गैंग में एक होमगार्ड भी है शामिल
गैंग में एक होमगार्ड भी शामिल बताया जा रहा है। यह ड्राइवर और सरगना के साथ झोलाछापों पर दवाब बनाकर वसूली में अहम भूमिका निभाता था। बीते कई दिनों से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में भी वह दिखाई दे रहा है, लेकिन जब से मामला सुर्खियों में आया है, वह नजर नहीं आ रहा है। इंटेलीजेंस जिला होमगार्ड कार्यालय से इस संबंध में जानकारी जुटा रही है। माना जा रहा है कि उसके पकड़ में आते ही सारे खेल का खुलासा हो जाएगा।