बरेली। फाइनेंस कंपनी में निवेश की गई लोगों की लाखों की रकम लेकर भागे ठग का पुलिस कोई सुराग नहीं लगा सकी है। जिस भवन में वह फाइनेंस कंपनी चला रहा था, उसके किरायेनामे में उसने खुद को बिहार का रहने वाला बताया है लेकिन उसका यह पता फर्जी निकला। उसकी और कोई पहचान जाहिर नहीं हो पाई।
चार दिन पहले सेटेलाइट बस स्टैंड के पास एक भवन में चल रही फाइनेंस कंपनी लोगों के लाखों की रकम हड़पने के बाद अचानक बंद कर दी गई थी। गुस्साए लोगों ने फाइनेंस कंपनी के दफ्तर में तोड़फोड़ कर दी थी। निवेशकों का कहना था कि उन्हें अच्छी कमाई का झांसा दिया गया था लेकिन जब उन्होंने अपनी रकम मांगी तो फाइनेंस कंपनी चलाने वाला दफ्तर बंद करके भाग गया। बारादरी पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जब जांच शुरू की तो पता चला कि ठग के बारे में किसी को कुछ पता ही नहीं है। यह भी पता नहीं लग सका कि बरेली में वह कहां रह रहा था। भवन स्वामी के पास मौजूद किरायानामा में ठग का नाम कुमार शानू लिखा था और बिहार के खगरिया जिले का पता पड़ा था।
इंस्पेक्टर बारादरी नीरज मलिक ने बताया कि ठग के पते की तस्दीक कराई गई लेकिन इस पते पर कोई व्यक्ति नहीं मिला। लोग उसके ऑफिस जाते थे लेकिन किसी ने भी उसके बारे में जानने की कोशिश नहीं की। ढाई महीने पहले ही उसने ऑफिस खोला था। वह लोगों को नेटवर्किंग के जरिए जोड़ता था। उसने पांच सौ लोगों को जोड़कर हर एक से ढाई हजार रुपये बतौर सिक्योरिटी जमा कराए थे। वह उन्हें फेविकोल और कागज के साथ लिफाफे बनाने को देता था और उन्हें खुद सात रुपये के रेट से खरीद लेता था। विश्वास जमने के साथ जब उस पर लोगों की देनदारी बढ़ी तो वह सबकी रकम लेकर भाग गया।