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Bareilly News: ज्वालामुखी की तरह फटे, उल्कापिंड की तरह बरसे सिलिंडर

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बरेली। रजऊ परसपुर गांव में अपनी दिनचर्या में व्यस्त ग्रामीण अचानक तेज धमाके की आवाज सुनकर चाैंक उठे। सोचा कि हाईवे से गुजर रहे किसी ट्रक का टायर फटा होगा। वे किसी नतीजे पर पहुंच पाते, इससे पहले ही दूसरा, तीसरा, चौथा... लगातार धमाके होने लगे। साथ ही, लोगों के खेतों में और घरों पर सिलिंडरों के अवशेष गिरने लगे। दहशत में लोग इधर-उधर भागने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सिलिंडर ज्वालामुखी की तरह फट रहे थे और उल्कापिंड की तरह आसमान से मलबा बरस रहा था।
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एक के बाद एक कई धमाके होने पर लोग जब घर से बाहर की ओर गए तो गांव से पश्चिम दिशा की ओर से काले धुएं का गुबार आसमान में उठता दिखा। छत पर छाने पर देखा तो महालक्ष्मी गैस एजेंसी के बाहर खड़े ट्रक में से ऊंची-ऊंची लपटें उठ रहीं थीं। इस दौरान कई और धमाके भी हुए। गैस एजेंसी की ओर जाने पर ज्वालामुखी के मुख की तरह आग का ऊंचा गोला दिखा। जलते हुए सिलिंडर हवा में ऐसे उड़ रहे थे जैसे आसमान से उल्कापिंड की बारिश हो रही हो।
मंजर देखकर उनके रोंगटे खड़े हो गए। सिलिंडर फटने के बाद कई टुकड़े गांव के किनारे पर मौजूद मकानों तक भी पहुंचे। यह देख ग्रामीण भाग खड़े हुए। देखते ही देखते पश्चिम दिशा की ओर से बने ज्यादातर मकान खाली हो गए। यहां रहने वाले गांव के केंद्र की ओर चले गए। इनमें से ज्यादातर दोमंजिला मकानों की छत पर चढ़कर आग की लपटें उठती हुए देख रहे थे। घटनास्थल की ओर जाने का साहस कोई नहीं जुटा पा रहा था।
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ओट लेकर खुद को बचाया
महालक्ष्मी गैस एजेंसी से एक किलोमीटर के दायरे में तीन गांव हैं। आसपास खेत हैं। गेहूं कटाई का सीजन होने के चलते सोमवार को बड़ी संख्या में किसान खेतों में ही थे। दोपहर के समय जब अचानक से धमाके होने लगे तो भगदड़ सी मच गई। गांव की ओर जाने वाला रास्ता एजेंसी के सामने से ही गुजरता है, यहां से जाना संभव नहीं था। ऐसे में सूझबूझ का परिचय देते हुए वह खेतों में ही लेट गए। जब उन्होंने आसमान से सिलिंडर बरसते देखे तो पेड़ सहित अन्य चीजों की ओट लेकर खुद को बचाया। कई ग्रामीण पास स्थित मगनापुर और सुंदरपुर गांव की ओर चले गए।
देररात तक नहीं गए खेतों की ओर
छुट्टा पशुओं से फसल की रखवाली के लिए खेतों में सोने वाले किसानों के चेहरे पर भी घटना के बाद खौफ नजर आया। चूंकि कई सिलिंडर खेतों में फसल के बीच पड़े थे, ऐसे में इनके फटने की आशंका को लेकर किसान खेतों की ओर ही नहीं गए। ब्यूरो
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