अब कैमरों में भी नजर नहीं आ रही है बाघिन
बरेली। रबर फैक्टरी में डेरा जमाए बाघिन के रेस्क्यू के लिए आई विशेषज्ञों की टीम बाघिन चालबाजी से परेशान होकर लौटने लगी है। सोमवार को टीम के कुछ सदस्यों के लौटने की जानकारी मिली है। हालांकि कानपुर चिड़ियाघर से आए विशेषज्ञ फिलहाल डटे हुए हैं। बाघिन की पैंतरेबाजी को देखते हुए फिर से रात में ही उसे ट्रैंक्युलाइज करने की योजना बनाई गई है।
फैक्टरी में बाघिन को पकड़ने में कामयाबी मिलना तो दूर अब उसकी झलक तक बमुश्किल मिल पा रही है। इससे रेस्क्यू के लिए आई वन विभाग के विशेषज्ञों की टीमें परेशान हैं। चार माह तक बाघिन की गतिविधियों पर नजर रखने के बाद टीम ने रेस्क्यू के लिए करीब 28 कैमरे लगाए थे। इनमें अलार्म कैमरा भी शामिल। इस सारी कवायद के बावजूद बाघिन को पकड़ने में सफलता नहीं मिल रही है। इधर, अब बारिश भी शुरू हो गई है, इसकी वजह से बाघिन के पगचिह्न भी नजर नहीं आ रहे हैं। बाघिन दिनभर फैक्टरी की किसी बिल्डिंग में छिपी रहती है। रात में ही शिकार के लिए निकलती है। हैरत की बात तो यह है कि वह उन स्थानों से भी दूरी बनाए है, जहां कैमरे लगे हैं। पगचिह्न बारिश से मिट जाते हैं। इससे उसकी गतिविधियों की जानकारी नहीं मिल पा रही है। लिहाजा करीब दस दिनों से डटी विशेषज्ञों की टीम के कुछ सदस्य लौट गए हैं।
रविवार को शिकार की तलाश में निकली थी बाघिन
रविवार को टीम फैक्टरी में बाघिन को ट्रेंक्युलाइज करने के लिए डेरा जमाए रही। देर रात एक सीसीटीवी कैमरे में उसकी तस्वीर भी कैद हो गई। रात भर वह शिकार की तलाश करती रही, लेकिन टीम को इसकी जानकारी नहीं मिली। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लगातार हो रही बारिश टीम के लिए मुसीबत बन रही है। इसकी वजह से बाघिन के पगचिह्न दिखाई नहीं दे रहे। रविवार को जगह-जगह बांधे गए पड्डे भी खोलकर गेट पर बांध दिए गए।